बहुचर्चित चारु अपहरण कांड में आठ साल बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। फास्ट ट्रैक कोर्ट जज सर्वेश कुमार पांडेय ने अपहरण के आरोपी अकरम पुत्र असलम निवासी तोपखाना, नाई की मंडी को दोषी पाते हुए पांच साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
11 अप्रैल 2008 को सदर बाजार निवासी शशिबाला पत्नी देवेंद्र अरोड़ा की इकलौती बेटी चारु (तब उम्र 16) को फुसलाकर अगवा कर लिया था। मामले में अकरम, अफजल और दो-तीन अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। हालांकि कुछ दिन बाद चारु खुद ही महिला थाने पहुंच गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी अचल सिंह और अधिवक्ता जय दयाल गौतम ने कोर्ट में नौ गवाह पेश किए। इस आधार पर कोर्ट ने मामला नाबालिग के अपहरण का पाते हुए सजा सुनाई। चारु का बयान छह मई 2008 को हुआ। कोर्ट ने चारु को 17 अप्रैल 2008 को मां-बाप के सुपुर्द कर आरोपी को जेल भेजा था।
दोबारा किया था अपहरण
आरोपी अकरम ने जेल से छूटने के बाद चारु का आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास से दोबारा अपहरण कर लिया था। उस वक्त मां-बाप चारु को दिल्ली ले जा रहे थे। इसमें भी देवेंद्र अरोड़ा ने अकरम के खिलाफ अपहरण और बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जीआरपी ने आरोपी के खिलाफ रेलवे कोर्ट में चार्जशीट पेश की। आरोपी ने इस चार्जशीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि चारु उसके साथ अपनी मर्जी से आई है और पत्नी के रूप में रह रही है, लेकिन कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया मगर, वह रेलवे कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। इस पर 24 अप्रैल 2015 को गैर जमानती वारंट जारी हुए, जो अभी भी जारी हैं।
चारु ने अकरम के समर्थन में दिया था बयान
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चारु ने आरोपी के समर्थन में बयान दिया था। कहा था कि 17 अप्रैल 2008 को दोनों की शादी हो चुकी है। वह उसी के साथ रह रही है। उसका एक चार साल का बेटा भी है। मगर, अपहरण के वक्त उसके चारु के नाबालिग होने के कारण कोर्ट ने मामला नाबालिग के अपहरण का पाते हुए आरोपी को सजा सुनाई।
‘मैंने हिम्मत नहीं हारी’
निर्णय के समय पीड़ित के पिता देवेंद्र अरोड़ा, मां शशिबाला, अकरम के परिवारीजन और चारु भी मौजूद थीं। चारु के माता-पिता ने निर्णय पर संतोष जाहिर किया। उनका कहना था कि उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। आरोपी पक्ष की तरफ से कई बार धमकी मिली। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी। अब वह इकलौती बेटी को पाने और सजा बढ़वाने के लिए हाईकोर्ट जाएंगे।