आगरा। बारह लाख रुपये हड़पने के लिए छुरे से साथी ठेकेदार की गला काटकर हत्या करने के मामले में घटना के 15 साल बाद फैसला आया है। एडीजे-22 बी नारायणन ने थाना मलपुरा क्षेत्र के गांव जारुआ निवासी अड्डू उर्फ मोहन को दोषी माना और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। दोषी ने साक्ष्य नष्ट करने के लिए शव को नहर में फेंक दिया था।
थाना सैंया में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, गांव अयेला के तत्कालीन प्रधान विजय सिंह ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया कि 13 दिसंबर, 2011 को सुबह गांव से बाहर रिश्तेदारी में गए थे। शाम को लौटे तो पता चला कि भगवतपुरा निवासी भानु प्रताप के खेत के सामने नहर में अज्ञात युवक का शव पड़ा है। किसी ने गला रेतकर हत्या कर दी है। पुलिस ने उनकी तहरीर पर हत्या एवं साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में अज्ञात आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज की।
विवेचना में मृतक की शिनाख्त छत्तीसगढ़ के थाना भिलाई क्षेत्र के गांव पुरसुका निवासी राम स्वरूप के रूप में हुई। वह घर से 1 नवंबर, 2011 को घर से लापता हुआ था। पुलिस ने हत्या के आरोप में मलपुरा थाना क्षेत्र के जारुआ निवासी अड्डू उर्फ मोहन और मुक्के उर्फ मुकेश को हिरासत में लिया। आरोपी अड्डू की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरा बरामद किया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी मुक्के उर्फ मुकेश मौत हो गई। उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से सात गवाह अदालत में पेश किए गए।
मृतक की पत्नी पर भी थी नजर
पुलिस को विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपी अड्डू उर्फ मोहन और राम स्वरूप दोनों गांव जारुआ में रहते थे। ईंट-भट्ठे पर ठेकेदारी करते थे। गोपाल प्रसाद ने नया भट्ठा शुरू किया तो उसे लेबर की जरूरत थी। उन्होंने राम स्वरूप को छत्तीसगढ़ से लेबर लाने के लिए 12 लाख रुपये दिये थे। यह बात आरोपी को पता चल गई। इसके अलावा आरोपी अड्डू के राम स्वरूप की पत्नी से अवैध संबंध थे। आरोपी रामस्वरूप को मारकर रुपये हड़पने के साथ उसकी पत्नी के साथ रहना चाहता था।