आगरा में पकड़े गए धर्मांतरण गिरोह ने बीमारी और बेरोजगारी दूर करने का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाया। पुलिस पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके और कई नए नाम सामने आए हैं।
धर्मांतरण गिरोह लोगों को बीमारी और बेरोजगारी दूर करने का झांसा देकर जाल में फंसाता था। गली-मोहल्लों में जाकर पहले मदद करते थे। इसके बाद में धर्म के प्रति भड़काते थे। किताबें भी वितरित की जाती थीं। जो लोग बातों में आते थे, उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से प्रेरित करते थे। कई बार रकम भी दी जाती थी। यह जानकारी धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों से पुलिस के सामने आई है।
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सदर निवासी दो सगी बहनों के धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने दिल्ली के परवेज अख्तर, जाशिम उर्फ जतिन कपूर, तलमीज उर रहमान और राजस्थान के डीग निवासी मौलाना हसन को गिरफ्तार किया था। न्यायालय ने चारों को तीन दिन की रिमांड दिया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी हैं।
यह बताया कि गिरोह कैसे काम करता है और कैसे लोगों को जाल में फंसाता था। आरोपी सजा काट रहे कलीम सिद्दीकी के लिए काम करते थे। उसके जेल जाने के बाद कई लोगों ने गिरोह की कमान संभाल ली थी। पूछताछ में सामने आया है कि यह लोग अलग-अलग जिलों के गली और मोहल्लों में जाते थे। पहले लोगों को पानी की बोतल, खाने का सामान वितरित किया जाता था।
इस दौरान कलीम सिद्दीकी की किताबें अपने पास रखते थे। जो लोग नौकरी और बीमारी की परेशानी बताते थे, उन्हें यह किताब दे दी जाती थी। इसके बाद में मोबाइल नंबर लेते थे। एक बार व्यक्ति के बात करने पर अलग-अलग लोग कॉल कर अपने धर्म की अच्छाइयां बताकर प्रभावित करते थे। सोशल मीडिया के माध्यम से धर्म परिवर्तन वाले वीडियो भी दिखाए जाते थे।
डीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि आरोपी को जेल में दाखिल कर दिया है। अभी और पूछताछ की जानी है। गिरोह को फंडिंग करने वाले और कितने लोग हैं, इसका पता किया जाएगा। इसके लिए कोर्ट में बुधवार को प्रार्थनापत्र देकर कम से कम 7 दिन की रिमांड मांगी जाएगी। अब तक की पूछताछ में 5-6 लोगों के नाम सामने आए हैं। इन लोगों के बारे में पुलिस टीम जानकारी जुटाएगी।
दिल्ली के डॉ.आदिल बाटला के हाउस में छिपा रखा है फंडिंग का रिकॉर्ड
पुलिस की पूछताछ में आरोपी परवेज अख्तर ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद के दवा सेंटर में धर्मांतरण संबंधी लेन-देन के रजिस्टर हैं। उसने पुलिस से पकड़े जाने के डर से शाहीन बाग में रजिस्टर छिपाकर रख दिए, जिसे बरामद करा सकता है। आरोपी तलमीज उर रहमान ने बताया कि कुछ टिकट और पैसों की फंडिंग का रिकॉर्ड दिल्ली के डॉ. आदिल बाटला हाउस स्थित एक परिचित के यहां पर रखा है।
इसी तरह जतिन कपूर ने बताया कि वह टैबलेट पर आर्थिक मदद का हिसाब रखता था। रकम लेन व देने की जानकारी एक्सेल फाइल बनाकर रखते थे। इससे कोई भी रकम लेने के बाद हेर-फेर नहीं कर सकता है। वह पाकिस्तान में बैठे गिरोह के सदस्यों से भी बात करता है। उनके नंबर भी हैं।
हसन मोहम्मद से पूछताछ में सामने आया कि अब्दुल रहमान गिरोह में मौलाना कलीम सिद्दीकी का दामाद है। उसने धर्मांतरण के संबंध में कई राज्यों के साथ कश्मीर तक में नेटवर्क फैला रखा है। कई सदस्य हैं। इनको अलग-अलग काम मिलता था। इन लोगों के मोबाइल नंबर एक रजिस्टर में अपने रिश्तेदार के यहां भरतपुर में छिपाकर रखे हैं, जिसे बरामद किया जा सकता है।