35 वर्षीय मिट्ठू पिछले कई साल से वेद नगर, कबाड़ बस्ती में रह रहा है। उसके पास न तो पहचान पत्र है और न ही उसे अपने मूल निवास का पता है। पूछने पर वह सिर्फ इतना ही बताता है कि उसके पिता बांग्लादेश से कोलकाता आए थे। वह बहुत छोटा था, इसलिए बहुत ज्यादा याद नहीं। मिट्ठू के इस खुलासे से खुफिया विभाग सकते में है। इसके बाद कबाड़ बस्ती में अब सीधे प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। बिना पूछताछ के किसी को बस्ती में घूमने नहीं दिया जा रहा।
बता दें कि धर्मांतरण प्रकरण में हिंदूवादी संगठनों और भाजपा ने ‘घर वापसी’ की आड़ में साजिशन बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रवेश का मामला उछाल दिया। इस सवाल के बाद कबाड़ बस्ती में रहने वाले कई लोगों से पूछताछ की गई। जिसमें से मिट्ठू ने सच्चाई उगल दी। हालांकि उसका बचाव करते हुए ठेकेदार इस्माइल ने कहा है कि बस्ती के अधिकांश लोग हिंदी समझ नहीं पाते, इसलिए हो सकता है कि उनके सुनने या बोलने में कोई भ्रम हुआ हो। इसके बाद शहर में दूसरे स्थानों पर झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे लोग भी निशाने पर आ गए हैं।
इधर, पुलिस ने रविवार को बस्ती के लोगों से मिलने पहुंचे लोगों को गेट पर ही रोक दिया। अधिकांश को तो लौटा ही दिया। कुछ लोगों को पूछताछ के बाद ही बस्ती में आने अनुमति दी गई।