धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 14 सदस्यों पर जेल में भी कड़ी नजर रखी जा रही है। उनकी सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। माता-पिता और पत्नी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की मुलाकात भाैतिक सत्यापन के बाद ही होगी। मुलाकातियों की सूची बनाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट खुफिया एजेंसियों को भी भेजी जा रही है।
सदर की सगी बहनों के अपहरण का मामला मार्च में पुलिस के पास पहुंचा था। पुलिस ने दोनों को कोलकाता से बरामद करते हुए 14 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। धर्मांतरण गिरोह के चंगुल में फंसी कई पीड़ित युवतियां पुलिस के सामने आई थीं। जबरन धर्मांतरण की बात भी सामने आई थी। गिरोह के तार मानव तस्करी और अंग बेचने वाले रैकेट से भी जुड़े हुए निकले हैं। इन पर पुलिस पड़ताल में लगी है। आरोपी जेल में हैं।
जेल प्रशासन सभी की मुलाकात पर भी नजर रख रहा है। मुलाकात के लिए जेल में एक स्थान निश्चित किया गया है। इसकी कैमरों से रिकार्डिंग की जा रही है। एक अधिकारी की उपस्थिति भी मुलाकात के दाैरान रहती है। जेल प्रशासन के मुताबिक, कुछ ही आरोपियों से मिलने माता-पिता और पत्नी आई हैं। इन तीनों के अलावा कोई और आएगा तो उसका भाैतिक सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद ही मुलाकात हो सकेगी। जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि जेल में बंद धर्मांतरण के आरोपियों की मुलाकात सत्यापन के बाद ही कराई जाएगी। इसकी रिपोर्ट भी भेजी जा रही है।
चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
शुक्रवार को सीजेएम कोर्ट में मास्टरमाइंड आरोपी अब्दुल रहमान के साथ ही उसमा खान, जुनैद कुरैशी और मोहम्मद रहमान कुरैशी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। तर्क दिया कि थाने से प्राप्त आख्या के अनुसार, एक संगठित गिरोह द्वारा विदेश से फंडिंग प्राप्त कर सामूहिक रूप से हिंदू लड़के व लड़कियों को जबरदस्ती विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराने के साक्ष्य मिले हैं। सुनवाई के बाद अदालत ने चारों आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।