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कवियों ने उठाई मंच से आवाज, कविताओं को किया जाए जीएसटी से बाहर

Tue, 04 Jun 2019 10:34 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन
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कवि सम्मेलन समिति के अधिवेशन में आए कवि - फोटो : अमर उजाला
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सुखधाम में आयोजित कवि सम्मेलन समिति के अधिवेशन में कवियों पर सरकार द्वारा लगाई जाने वाले जीएसटी और बौद्धिक सम्पदा के संरक्षण का मुद्दा छाया रहा। 
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कवि सम्मेलन समिति के अध्यक्ष अरुण जैमिनी ने कहा कि कवि की कविताओं और उसके संवाद को जीएसटी के दायरे में लाना उचित नहीं। यह कोई सेवा या व्यापार नहीं बल्कि एक कवि के विचार और उसका भाव है।

इस संबंध में केन्द्र सरकार और जीएसटी परिषद से एक प्रतिनिधि मंडल मिला है। संभवत: कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। सह सचिव चिराग जैन ने कहा कि कविताओं के प्रस्तुतिकरण को जीएसटी लगाने से साहित्य पर जीएसटी लगाने जैसा है। जो कि अनुचित है।
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जीएसटी से कविताओं को बाहर लाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं कवि गोविन्द व्यास ने कहा कि आंचलिक कविता की लोकप्रियता की चर्चा करते हुए कहा कि मंच को सिर्फ परफॉर्मिंग आर्ट न बनाएं अन्यथा कविता मर जाएगी। 

डॉ. कविता किरण, सरिता शर्मा, पूनम वर्मा सहित कवयित्रियों की यात्रा के दौरान सुरक्षा, मंच पर उनके आचरण और संयोजकों और आयोजकों से उनके व्यवहार और उनकी स्वयं की गरिमा पर चर्चा की।
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