आगरा। व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति ठप होने से मिठाई, रेस्तरां और पेठा कारोबार पर गहराते संकट के बीच कारोबारियों ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी अरविंद बंगारी से कलेक्ट्रेट में मुलाकात की। इस दौरान व्यापारियों ने डीएम से बैठक में दो टूक शब्दों में कहा कि या तो गैस दिलाएं या उन्हें कोयला और डीजल भट्ठियां जलाने की अनुमति दी जाए। ऐसा न होने पर दुकानों की चाबियां प्रशासन संभाल ले।
व्यावसायिक गैस सिलिंडर पर निर्भर 2000 से अधिक हलवाई और 500 से अधिक होटल-रेस्तरां में चूल्हे बुझ गए हैं। बृहस्पतिवार को इस संबंध में चैंबर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज और होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के बैनर तले जुटे उद्यमियों ने जिलाधिकारी अरविंद बंगारी के साथ कलेक्ट्रेट में बैठक कर काम में आ रहीं मुश्किलें गिनाईं।
बैठक के दौरान जब व्यापारियों ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में कोयला या डीजल भट्ठियां जलाने की अनुमति मांगी, तो जिलाधिकारी ने स्पष्ट हाथ खड़े कर दिए। डीएम ने कहा कि ताजनगरी इको सेंसिटिव जोन में है, जहां पर्यावरण मानकों के चलते कोयला और डीजल स्टोव पर सख्त पाबंदी है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि व्यावसायिक सिलिंडर की किल्लत को लेकर मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
इस दौरान राजकुमार भगत अध्यक्ष, चैंबर ऑफ फूड प्रोसेसिंग, टीएन अग्रवाल अध्यक्ष आगरा व्यापार मंडल और राजेश अग्रवाल अध्यक्ष पेठा कुटीर एसोसिएशन ने व्यावसायिक गैस सिलिंडर की किल्लत पर प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। बैठक में जय अग्रवाल, अमित अग्रवाल, दिवाकर, शिवम, दिलीप आदि मौजूद रहे।
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व्यापारियों की मांगें और तर्क
- कोटा निर्धारित हो: व्यापारियों ने मांग उठाई कि जिस तरह अस्पतालों के लिए कोटा तय है, उसी तर्ज पर खाद्य उद्योगों के लिए भी 20 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाए।
- ग्रीन गैस का इन्कार: ग्रीन गैस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल नए कनेक्शन देना संभव नहीं है। फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने में ही कम से कम एक महीने का समय लगेगा।
- आपूर्ति पर नियंत्रण: जिलापूर्ति अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति सीधे तौर पर सरकार के नियंत्रण में है, जिससे स्थानीय स्तर पर वितरण में बाधा आ रही है।
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50 हजार कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
आगरा के पेठा और मिष्ठान उद्योग से न केवल स्थानीय बल्कि बंगाल और बिहार के हजारों कारीगर जुड़े हैं। शहर में करीब 10 बड़े मिष्ठान भंडार और 2000 से अधिक छोटे-बड़े हलवाई हैं। गैस न मिलने से भट्ठियां ठंडी पड़ रही हैं, जिससे मजदूरों के सामने पलायन की स्थिति पैदा हो गई है।
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बिना गैस कैसा कारोबार
- बिना ईंधन के कारोबार संभव नहीं है। अगर सरकार गैस उपलब्ध नहीं करा सकती और टीटीजेड के नाम पर वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं करने देगी, तो हम अपने प्रतिष्ठान बंद कर चाबियां जिलाधिकारी को सौंप देंगे।
राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन