आगरा जिला अस्पताल में लचर व्यवस्थाओं का खामियाजा मरीज और तीमारदारों काे भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में जहां जगह-जगह गंदगी फैली हुई है, वहीं मरीजों को दवा भी बाहर से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मरीजों का आरोप है कि फार्मेसी काउंटर पर दवाएं देने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
अस्पताल परिसर में सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग लगी होने के कारण मरीजों को अंदर जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बीच रास्ते में ही लोहे की टूटी चेयर का सेट पड़ा हुआ है। विकास ने कहा कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। कक्ष तो खुला रहता है, लेकिन कई बार चिकित्सक आते ही नहीं हैं। फूलवति ने बताया कि पर्चे में लिखी कुछ दवाएं ही अस्पताल से मिलती हैं, बाकी बाहर से ही खरीदनी पड़ती हैं।
बोले मरीज
राजाखेड़ा निवासी पूरन सिंह का कहना है कि आंखों को दिखाने आएं हैं। फार्मेसी काउंटर पर कहा गया कि कल रिपोर्ट लेकर आना, तब दवाएं देंगे। जबकि डाॅक्टर ने रिपोर्ट देखकर ही दवा लिखी है। दूसरे मरीज के पर्चे में केवल दो दवाएं ही अस्पताल में मिली हैं।
अस्पताल से मिल रही हैं दवाएं
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक राजेंद्र अरोड़ा ने बताया कि मरीज और तीमारदार गाड़ियां लेकर परिसर के अंदर तक आ जाते हैं। इसलिए बैरिकेडिंग की गई है। दवाएं ज्यादातर अस्पताल के अंदर मिल जाती हैं। एसएन के ट्रेनी छात्र जानकारी के अभाव में कभी-कभी बाहर की दवाएं लिख देते हैं।