आगरा में व्यावसायिक भवन के बेसमेंट को केवल पार्किंग बताकर स्टांप शुल्क बचाने के मामले में कंपनी पर 31.30 लाख रुपये से अधिक की वसूली का आदेश हुआ है। जांच में बेसमेंट का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होता मिला, जिसके बाद कलेक्टर स्टांप की अदालत ने बकाया शुल्क, निबंधन शुल्क और अर्थदंड लगाया।
व्यावसायिक संपत्ति की खरीद में सही जानकारी छिपाकर बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाली कंपनी मैसर्स केटीएल प्राइवेट लिमिटेड पर प्रशासन ने शिकंजा कसा है। जिलाधिकारी/कलेक्टर स्टांप मनीष बंसल की अदालत ने स्टांप चोरी के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी क्रेता कंपनी पर कमी स्टांप शुल्क, निबंधन शुल्क और अर्थदंड मिलाकर कुल 31,30,470 रुपये का जुर्माना और बकाया सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही विलेख निष्पादन तिथि 2 नवंबर 2021 से पूरी धनराशि जमा होने तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से साधारण ब्याज भी वसूलने का फरमान सुनाया गया है।
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यह पूरा मामला बाईपास रोड स्थित पलक टावर का है, जहां विक्रेता मैसर्स सारांश इंफ्रॉरेंटल्स प्रा. लि. के अधिकृत प्रतिनिधि पुनीत चड्ढा द्वारा क्रेता कंपनी मैसर्स केटीएल प्रा.लि. के अधिकृत प्रतिनिधि किदवई नगर कानपुर निवासी सौरभ द्विवेदी के पक्ष में व्यावसायिक संपत्ति का बैनामा किया गया था। क्रेता कंपनी ने दस्तावेज में दर्ज कराया कि उसने केवल भूतल पर 670.38 वर्ग मीटर का हॉल (दुकान) खरीदा है और 4000 वर्ग फुट के बेसमेंट का उपयोग सिर्फ कार पार्किंग के लिए किया जा रहा है।
इसका कोई क्रय-विक्रय नहीं हुआ है। हालांकि, उप निबंधक प्रथम सदर की गोपनीय जांच ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। पड़ताल में सामने आया कि भगवान टॉकीज से वाटरवर्क्स मुख्य मार्ग सेगमेंट पर स्थित इस व्यावसायिक परिसर के भूतल पर मारुति सुजुकी का शोरूम चल रहा है, जबकि 371.59 वर्ग मीटर के बेसमेंट का उपयोग बिक्री के लिए गाड़ियां खड़ी करने के व्यावसायिक गोदाम के रूप में किया जा रहा है। जांच में स्पष्ट हुआ कि बेसमेंट भवन का मूल व अटूट हिस्सा है। स्टांप ड्यूटी बचाने की नीयत से तथ्यों को छिपाया गया।
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कलेक्टर स्टांप ने क्रेता पक्ष द्वारा 14 जुलाई 2025 को दी गई आपत्ति को साक्ष्यहीन मानते हुए सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने 1 अगस्त 2017 से प्रभावी सर्किल रेट के आधार पर पुनर्मूल्यांकन करते हुए 22,46,410 रुपये स्टांप शुल्क और 3,21,060 रुपये निबंधन शुल्क की चोरी पकड़ी और स्टांप अधिनियम की धारा-40(ख) के तहत 5,62,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि कंपनी एक माह के भीतर बकाया धनराशि जमा कर चालान की प्रति प्रस्तुत करे, अन्यथा रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।