फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budget 2018: परिवार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा बजट

Fri, 02 Feb 2018 06:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
बजट देखते परिवार के लोग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
वित्त मंत्री अरुण जेटली के 2018-19 के बजट से मध्यम वर्गीय परिवार को काफी उम्मीदे थीं, लेकिन यह बजट उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। जीएसटी लागू होने के बाद किचन का बजट तो पहले से ही बिगड़ा था। 
विज्ञापन


अब कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी से आम जरूरत के मोबाइल फोन और एलईडी भी महंगे हो गए हैं। थोड़ी-बहुत उम्मीद आयकर दरों में संशोधन की थी, लेकिन उसमें भी कोई राहत नहीं दी गई।

बल्केश्वर निवासी मध्यम वर्गीय परिवार के मुखिया ऋषि चतुर्वेदी ने बताया कि उनकी मासिक आय 40 हजार है। परिवार में छह सदस्य हैं। इसमें दो बच्चे, माता, पिता और पत्नी शामिल हैं। 
विज्ञापन

इस बजट से महंगाई पर लगाम लगने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया। उल्टा शिक्षा और स्वास्थ्य पर एक प्रतिशत का सेस बढ़ाकर झटका और दे दिया। 

अभी तक बच्चों की पढ़ाई पर मासिक छह हजार का खर्च आता था। अब यह बढ़ जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अधिक खर्च करना पड़ेगा। 

पेट्रोल और डीजल के दामों पर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई तो लगा कि इनमें दाम कम होंगे, लेकिन आठ प्रतिशत रोड सेस लगाकर इसका असर भी खत्म कर दिया गया। 
विज्ञापन

महंगा हो गया इलाज

वहीं, उनकी पत्नी गायत्री चतुर्वेदी का कहना है कि हर माह रसोई पर दस हजार का खर्च आता है। बजट में इसके कुछ कम होने की उम्मीद थी, लेकिन जीएसटी के कारण ऐसा नहीं हो सका। 

ऋषि के पिता देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा पर एक प्रतिशत सेस बढ़ने के बाद अब इलाज और महंगा हो जाएगा। बुढ़ापे में हर रोज दवाइयां चलती ही रहती हैं। सरकार को यह सेस नहीं बढ़ाना चाहिए था। ऋषि ने बताया कि कुल मिलाकर बजट मध्यम वर्ग के हित में नहीं है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें