आगरा में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस के अधिकार बढ़ जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों की कई शक्तियां मिल जाएंगी। कमिश्नर धारा 144 लगा सकेंगे। कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में फायरिंग का आदेश लेने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं लेनी होगी। शांति भंग के मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कार्रवाई तय कर सकेगी। गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट की फाइल को प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं भेजना होगा।
- उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970
- विष अधिनियम 1919 के विधिक अधिकार
- अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के विधिक अधिकार
- पुलिस (द्रोह-उद्दीपन) अधिनियम, 1922 के विधिक अधिकार।
- पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के विधिक अधिकार।
- विस्फोटक अधिनियम 1884 के विधिक अधिकार।
- कारागार अधिनियम 1894 के विधिक अधिकार।
- सरकारी गोपनीयता अधिनियम 1923 के विधिक अधिकार।
- विदेशी अधिनियम 1946 के विधिक अधिकार।
- गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के विधिक अधिकार।
- भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के विधिक अधिकार।
- उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम 1944 के विधिक अधिकार।
- उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005 के विधिक अधिकार।
- उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के विधिक अधिकार।
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1 पुलिस कमिश्नर (आईजी या उससे ऊपर रैंक का अधिकारी)
असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर, अपर डिप्टी पुलिस कमिश्नर, डिप्टी पुलिस कमिश्नर, अपर पुलिस कमिश्नर, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त होंगे। अपर पुलिस कमिश्नर, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर को अपर जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था : पुलिस शांति भंग में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करती है। मजिस्ट्रेट अपने स्तर से कार्रवाई कर अधिकतर मामलों में तत्काल जमानत दे देते हैं।
नई व्यवस्था : शांति भंग के मामलों में मामले की संवदेनशीलता को देखने के बाद आगे की कार्रवाई पुलिस कमिश्नर को दिए गए अधिकार के तहत तय होगी।
पुरानी व्यवस्था : इसके तहत अगर, पाबंद किए गए लोग यदि दूसरी घटना में शामिल होते थे तो कोई कार्रवाई नहीं होती।