गृहकर वसूली में चल रहे ‘खेल’ पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू हो गई है। तमाम शिकायतों के बाद कमिश्नर ने नगर निगम से टैक्स वसूली से जुड़े कर्मचारी और अधिकारियों का विवरण तलब किया है। कमिश्नर के इस रुख से नगर निगम में हड़कंप मच गया है। खासतौर से उन कर्मचारियों की धड़कन तेज हो गई है जो सालों से एक ही जगह पर तैनात होकर ‘मलाई’ खा रहे हैं।
नगर निगम में गृहकर में हेराफेरी का ‘खेल’ लंबे समय से चल रहा है। कर निर्धारण से लेकर उसकी वसूली तक में कर्मचारी अपनी ‘वसूली’ में लगे हैं। भवन के असेसमेंट में खेल किया जा रहा है। जिस पुराने भवन को तोड़कर उसमें मल्टीस्टोरी या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना दिया गया है, उससे भी उतना ही गृहकर वसूला जा रहा है, जितना अकेले उस भवन से वसूला जा रहा था। ऐसी तमाम शिकायतें जब कमिश्नर को मिलीं तो उन्होंने नगर निगम को पत्र लिखकर कर निर्धारण से लेकर इसकी वसूली से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची तलब की है। कुछ लोगों ने कमिश्नर से यह भी शिकायत की थी कि कई कर्मचारी सालों से एक ही जगह तैनात हैं और गृहकर के खेल को संचालित कर रहे हैं। कुछ पार्षदों ने भी गृहकर वसूली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि शहर में 50 से 60 करोड़ रुपये की सालाना वसूली हो सकती है, जबकि इसके एवज में नगर निगम बीस लाख रुपये की वसूली में ही सिमट जा रहा है। यदि असेसमेंट सही हो तो वसूली बढ़ेगी।