आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने छात्रों की सुविधा के लिए स्व-केंद्र नीति पर अपनी मुहर लगा दी है। कुलपति प्रो. आशु रानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में छात्र संख्या 100 या उससे अधिक है, उन्हें परीक्षा केंद्र बनाया जा सकेगा।
समिति ने वर्तमान सम सेमेस्टर में लागू इस प्रायोगिक व्यवस्था पर चर्चा की। सेल्फ सेंटर होने से छात्रों को दूसरे केंद्रों पर जाने की असुविधा नहीं होगी और परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी। इस नीति से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि छात्र अपने ही कॉलेज के परिचित वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। फिलहाल इस व्यवस्था को परीक्षण के तौर पर मंजूरी दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षाओं के सफल समापन के बाद इस नीति की प्रभावशीलता और निष्पक्षता की समीक्षा करेगा। यदि परिणाम सकारात्मक रहे, तो भविष्य में इसे स्थायी रूप से लागू करने पर विचार किया जाएगा।
ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं कुलपति के साथ बैठक में परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश, वित्त अधिकारी महिमा चंद्र, प्रो. मनु प्रताप सिंह, प्रो. पुष्पेंद्र सिंह, प्रो. संजय कुमार मिश्रा और अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।
20 से कम छात्र होने पर नोडल केंद्रों पर होंगी प्रयोगात्मक परीक्षाएं
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रयोगात्मक और मौखिक परीक्षाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के ऐसे सभी संबद्ध कॉलेज, जहां किसी विषय में छात्र संख्या 20 से कम है, उनकी प्रयोगात्मक परीक्षाएं अब उनके अपने कॉलेज के बजाय निर्धारित नोडल केंद्रों पर होंगी।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित पाठ्यक्रमों के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। प्रयोगात्मक और मौखिक परीक्षा संपन्न कराने के लिए पूरे मंडल में 17 महाविद्यालयों और आवासीय संस्थानों को नोडल केंद्र बनाया गया है। आगरा जनपद की बात करें तो विश्वविद्यालय के विभिन्न आवासीय संस्थानों के अलावा सेंट जोंस कॉलेज और बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय को भी केंद्र बनाया गया है। संबंधित कॉलेजों को अब विषयवार अपने छात्रों की परीक्षा इन्हीं आवंटित केंद्रों पर करानी होगी।