उसकी तैनाती शमसाबाद स्थित बैंक की शाखा में हो गई। वर्ष 2020 में दोनों शमसाबाद मार्ग स्थित रामरघु एग्जॉटिका में रहने लगे थे। सचिन ने सितंबर में भाई गौरव के नाम से पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया तो बहू ने सचिन से झगड़ा किया। 11 अक्तूबर को सचिन घर आया था। उसने सारी बातें बताई थीं। 10 बजे बेटे के साले कृष्णा रावत ने फोन करके सचिन और प्रियंका के बीच झगड़े की जानकारी दी।
उन्होंने फोन मिलाया तो स्विच ऑफ था। 12 अक्तूबर की शाम बेटे के ससुर बिजेंद्र रावत ने उन्हें फोन कर सचिन के मौत की जानकारी दी। वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि बेटे के शरीर पर चोट के निशान थे। उन्होंने सचिन की हत्या का आरोप बहू प्रियंका, उसके पिता बिजेंद्र रावत, भाई कृष्णा रावत और एक अज्ञात पर लगाया था। केस में दोषी मृतक का साला कृष्णा रावत जेल में था। पत्नी और ससुर जमानत पर चल रहे थे।
पुलिस को मिले थे डिजिटल साक्ष्य
मुकदमे की विवेचना निरीक्षक क्राइम राजकुमार ने की थी। मृतक का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल से कराया गया था। इसमें मौत गला दबाने से होने की पुष्टि हुई थी। जलाया भी गया था। पुलिस ने घर से प्रेस और कपड़े बरामद किए थे। कृष्णा रावत के बहन प्रियंका के घर पर पौन घंटे तक रुकने की पुष्टि हुई थी। डिजिटल साक्ष्य मिल गए थे। हत्या के बाद घटना को आत्महत्या दर्शाने का प्रयास किया गया था।
घर में कलह बनी वजह
सचिन के पिता केशव देव शर्मा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। पुलिस विवेचना के मुताबिक, हत्या की वजह कलह बनी थी। पत्नी को पति का परिजन से मिलना पसंद नहीं था। विवेचना में पाया गया था कि घटना वाले दिन सचिन गांव गए थे। परिवार से मिलकर आए थे। सचिन ने भाई के नाम से पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया था। पत्नी इससे नाराज थी। पति के घर आने पर पत्नी ने झगड़ा किया। अपने भाई को बुला लिया था। इसके बाद ही हत्या की गई थी। पिता का कहना है कि बेटे की 11 अक्तूबर को हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उन्हें सूचना दी गई। बिजेंद्र रावत ने डीएम से शिकायत कर रात में ही शव का पोस्टमार्टम कराने का दबाव बनाया था। इस पर पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया था।
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