उद्योगों की कैटेगरी तय करने की नई नीति ने ताज ट्रिपेजियम जोन की इकाइयों के विस्तार और नए निर्माण पर संकट खड़ा कर दिया है। व्हाइट कैटेगरी से आगरा जिले के 110 कोल्ड स्टोरेज पर तलवार लटक गई है, जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी के बिना संचालित हो रहे हैं और निर्माणाधीन हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले ऐसे ही कोल्ड स्टोरेज पर कार्रवाई होना तय है।
आगरा और अलीगढ़ मंडल में पूरे उत्तर प्रदेश के आधे से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज संचालित हो रहे हैं। अकेले आगरा जिले में ही 240 से ज्यादा रजिस्टर्ड कोल्ड स्टोरेज हैं और करीब 80 बिना रजिस्ट्रेशन के ही चलाए जा रहे हैं। 30 कोल्ड स्टोर इस साल निर्माणाधीन हैं। इस तरह करीब 110 कोल्ड स्टोर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण मंजूरी के बिना ही बनाए गए हैं। शुरू करने से पहले ऐसे कोल्ड स्टोरेज को पर्यावरण मंजूरी लेनी होगी। व्हाइट कैटेगरी की अधिसूचना जारी होने के बाद ऐसे ही बिना एनओसी के बनाए गए कोल्ड स्टोरेज पर कार्रवाई हो सकती है। अधिसूचना के बाद अगर आवेदन किया गया तो इन्हें उसके बाद निर्मित होना माना जाएगा और व्हाइट कैटेगरी में अनुमति दी ही नहीं जा सकेगी।
कल टीटीजेड के सभी औद्योगिक संगठनों की बैठक
ताज ट्रिपेजियम जोन के तहत सभी जिलों के औद्योगिक संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं की बैठक आगरा में बुलाई गई है। मथुरा और फीरोजाबाद के उद्यमी व्हाइट कैटेगरी के ड्राफ्ट से बेहद चिंता में हैं। रविवार दोपहर में सांसदों के साथ आंदोलन की संयुक्त रणनीति तैयार करेंगे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चेयरमैन, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और संसदीय समिति से भी मिलने के लिए संपर्क किया गया है।
‘ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी ने व्हाइट कैटेगरी पर आगरा का पक्ष ठीक ढंग से नहीं रखा है। पूरे जोन के उद्यमी परेशान हैं। हम इस मामले को हर स्तर पर ले जाएंगे। आगरा को उद्योग के लिहाज से भुतहा शहर तो कतई न बनने दिया जाएगा।’
राकेश गर्ग
प्रदेश अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
‘आलू की सबसे बड़ी बेल्ट आगरा है, लेकिन यहीं आलू रखने के लिए कोल्ड स्टोर नहीं लगा पाएंगे तो फिर कोल्ड चेन कैसे बनेगी। नई कैटेगरी से कोल्ड स्टोरेज को मुक्त करना चाहिए। उपज का खराब होना किसान नहीं, बल्कि देश का नुकसान है।’
भुवेश अग्रवाल
सेल चेयरमैन, कोल्ड चेन, नेशनल चेंबर