बटेश्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां विसर्जित करने बटेश्वर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चंद कदमों की दूरी पर स्थित उनके पैतृक निवास स्थल पर नहीं पहुंचे। इससे न सिर्फ अटलजी के रिश्तेदार और परिजन बल्कि ग्रामीण भी आहत हुए। योगी के इंतजार में तमाम परिजन और रिश्तेदार उनके पैतृक निवास स्थल पर सजाए गए पंडाल में इंतजार करते रह गए।
बटेश्वर स्थित अटलजी के पैतृक निवास स्थल पर योगी के आने को लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। खंडहर हो चुके निर्माण स्थल पर झाड़ियों को साफ कराया गया था। नया खरंजा बनाया गया। उनके कुल देवी मंदिर की रंगाई-पुताई के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई कराई गई थी।
टीले पर स्थित पैतृक निवास स्थल के अवशेषों के पास पंडाल सजाया गया था। यहीं पर सीएम योगी से बातचीत के लिए अटलजी के कुछ परिजन और रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया था। मगर, घंटों के इंतजार के बाद उन्हें मायूस होना पड़ा। अस्थि विसर्जन के बाद जैन मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हो कर वह सीधे हेलीपैड की ओर निकल गए।
इंतजार करते रह गए परिजन
अटलजी के परिजन और रिश्तेदार
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इधर, परिजन और रिश्तेदार उनका इंतजार करते रह गए। हालांकि इससे पहले कुछ परिजनों ने अस्थि विसर्जन कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभा में प्रवेश की भी कोशिश की लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें प्रवेश ही नहीं करने दिया। इससे वह काफी आहत हैं।
उनका कहना था कि जिस व्यक्ति की योगी अटलजी की अस्थि विसर्जित करने आए, उनका पैतृक निवास स्थल किस हालत में है यह देखना तक उचित नहीं समझा। ग्रामीणों का भी कहना था कि योगी के पास अटलजी के पैतृक गांव और निवास स्थल को ही देखने का समय नहीं था तो, यहां प्रशासनिक तैयारियों पर इतना खर्च क्यों किया गया।
अटलजी की भतीजी कृष्णा तिवारी ने कहा कि हम सुबह से ही मुख्यमंत्री योगी जी से मिलने के लिए उनके इंतजार में बैठे थे लेकिन वह अटलजी के पैतृक निवास पर आए ही नहीं। हमें काफी दुख हुआ। यहां तक आने के बाद भी वह अटलजी का निवास स्थान देखने नहीं आए।
अटलजी की भतीज बहू राजश्री ने बताया कि जब योगीजी को अटलजी के पैतृक निवास स्थल पर आना ही नहीं तो हमें यहां इतनी देर तक कैद करके क्यों रखा गया। न ही अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में शामिल होने दिया। ऐसी व्यवस्थाओं का क्या फायदा, जिससे परिजनों को ही दूर रखा गया।