फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तस्वीरों में ही पक्षियों को देखकर लौटे मुख्यमंत्री

Sun, 06 Dec 2015 01:07 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बाह (आगरा)
विज्ञापन
विज्ञापन
बेशक कोई टिप्पणी नहीं की होगी लेकिन बर्ड फेस्टिवल के मुख्य कार्यक्रम के आयोजनस्थल के चयन में हुई चूक खुद मुख्यमंत्री के सामने उजागर हुई। बर्ड वॉचिंग के लिए ‘घड़ियालों के घर’ चंबल सेंक्च्युरी में निकले अखिलेश यादव को पक्षी तो इक्का-दुक्का ही नजर आए। बाह क्षेत्र में चार घंटे से ज्यादा बिताने के बाद भी मुख्यमंत्री को प्रदर्शनी में चिड़िया और चंबल नदी में मोटरबोट का सफर करके ही संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन

जरार स्थित चंबल सफारी लॉज के परिसर में आयोजित बर्ड फेस्टिवल के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से जैतपुर पहुंचे। यहां से उनका काफिला बर्ड वॉचिंग के लिए चंबल सेंक्च्युरी के नंदगवां घाट के लिए रवाना हुआ। चंबल नदी किनारे पहुंचते ही सीएम की निगाहें पक्षियों को देखने के लिए इधर-उधर घूमने लगीं मगर, एक भी पक्षी नहीं दिखा। उन्हें देखने के लिए वह चुनिंदा लोगों के साथ मोटरबोट में सवार हुए।
उन्होंने लगभग आधा घंटा तक जलभ्रमण किया। गुढ़ा गांव तक के सफर में उन्हें आसमान पर उड़ान भरते चंद पक्षी ही नजर आए। हां, इस दौरान उन्हें घड़ियाल और मगरमच्छ जरूर बड़ी संख्या में नजर आए। दो डाल्फिनें भी गोते लगाते हुए दिखीं। चंबल भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय वन अधिकारियों को फेस्टिवल के सफल आयोजन के लिए सराहा। वन्य जीव प्रतिपालक श्याम बाबू मिश्रा ने बताया कि सीएम को चंबल और इसकी वादियां खूब भायीं।  
विज्ञापन

बता दें, बर्ड फेस्टिवल के पहले दिन सुबह-सुबह भ्रमण पर निकले जरार में जुटे पक्षीप्रेमियों और विशेषज्ञों को भी घड़ियाल देखकर ही लौटना पड़ा था। जब वे लौटे तो उनकी जुबां पर पक्षी कम चंबल घाटी के सौंदर्य की चर्चा ही ज्यादा थी।
मुख्य सचिव का स्टीमर स्टार्ट ही नहीं हुआ
चंबल नदी किनारे पक्षियों को देखने के लिए मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव आलोक रंजन भी गए थे। सीएम के स्टीमर में अधिक लोग हो जाने के कारण वह दूसरे स्टीमर में बैठ गए। मगर, काफी देर तक उनका स्टीमर ही स्टार्ट नहीं हो सका। ऐसे में वे चंबल नदी का भ्रमण किए बिना ही लौट आए।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें