फिरोजाबाद। जेड़ाझाल परियोजना पर संकट के बादल है। योजना के रख-रखाव के लिए शासन को दो बार प्रस्ताव भेजा गया। प्रस्ताव एक बार भी पास नहीं हो सका। शासन द्वारा बजट उपलब्ध न कराने के कारण अधिकारियों को गंगा जल की सप्लाई को यथावत रखने में दिक्कत आ रही हैं। शहर को मिलने वाले गंगा जल की सप्लाई यथावत बनी रहे। इसके एवज में नगर निगम जल निगम को प्रतिमाह 50 लाख रुपये उपलब्ध करा रहा है। अगर, निगम ने जल निगम को पैसा देना बंद कर दिया तो शहर में गंगा जल का संकट खड़ा हो जाएगा।
करीब दो वर्ष पूर्व शुरू हुई जेड़ाझाल परियोजना के मेंटीनेंस के लिए जल निगम के पास पैसे नहीं है। रख-रखाव के लिए जल निगम के अफसरों ने दो बार अलग-अलग तरीके से शासन को प्रस्ताव भेजा है। सात माह के लिए करीब 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था। वहीं पांच साल के लिए 214 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था लेकिन दोनों में से एक भी प्रस्ताव पास नहीं हो सका। शासन से बजट न मिलने के कारण जल निगम के अधिकारियों को योजना यथावत रखने को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अफसरों की माने तो यदि शासन से जल्द बजट उपलब्ध नहीं होता है तो आने वाले दिनों में दिक्कत खड़ी हो जाएगी। क्योंकि नगर निगम प्रतिमाह जो 50 लाख रुपये उपलब्ध करा रहा है। उससे खर्च पूरे नहीं हो पा रहे।
- शहर को मिलता है प्रतिदिन 65 से 70 एमएलडी पानी
करीब सात लाख की आबादी वाले शहर को प्रतिदिन 65 से 70 एमएलडी पानी जल निगम जेड़ाझाल परियोजना से उपलब्ध कराता है। वहीं 40 से 45 एमएलडी पानी जलकल विभाग अपने अन्य स्रोतों से उपलब्ध कराता है। तब कहीं जाकर शहरवासियों को पर्याप्त पानी मिल पाता है।
- इन मदों पर खर्च किया जाता है पैसा
नहर की साफ सफाई, बिजली का बिल, लीकेज आदि ठीक कराना, टंकियों की साफ-सफाई के साथ अन्य कार्यों के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है लेकिन विभाग के पास बजट न होने के कारण सभी कार्य रुके हुए है।
- शासन को दो बार प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। एक बार 20 करोड़ जबकि दूसरी बार 214 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन आज तक बजट नहीं मिला है। नगर निगम 50 लाख रुपये प्रतिमाह दे रही है। उससे ही जरुरी कार्य निपटाए जा रहे है जिससे शहर को पानी मिलता रहे।
दिनेश चंद्र शर्मा, सहायक अभियंता, जल निगम