एटा। कृषि की जमीन नहीं होने के बावजूद भी सरकार पशुपालकों को केसीसी की सुविधा देने जा रही है। इतना ही नहीं बैंकों की ओर से केसीसी मुहैया कराने के लिए शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा।
किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधाएं अब तक जमीन पर खेती करने के लिए बैंकों की ओर से दी जा रही थी लेकिन सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए पशुपालकों को भी केसीसी के दायरे में लाकर ऋण देने की तैयारियां कर ली हैं। केसीसी की सुविधाएं लेने के लिए अब जमीन का होना जितना ही जरूरी नहीं है। पशुपालकों के पास गाय, भैंस और बकरी हैं तो वह केसीसी कराकर उनका भरण पोषण कर सकता है और उससे होने वाली आय से नियमित खाता संचालित कर ऋण चुकता करना होगा। सबसे पहले गाय और भैंस की संख्या पांच से दस तक होनी चाहिए। बकरियों की संख्या 15 से 20 तक होना अनिवार्य हैं। इसी तरह ऐसे लोग भी केसीसी का लाभ ले सकेंगे जो मछली का पालन करते हैं। इसके लिए केसीसी की योजना पाने वाले की छवि साफ सुथरी होनी चाहिए और किसी बैंक से डिफाल्टर नहीं हो। ऐसे लोग सरकार की नई नीति का लाभ उठाने के हकदार होंगे।
केसीसी के नियमों में सरकार की ओर से बदलाव किया गया है। अब तक कृषि करने वाले किसानों को ही केसीसी देने का प्रावधान था लेकिन अब पशुपालक, मत्स्य पालक, भेंड बकरी पालकों को भी केसीसी कर ऋण दिया जाएगा।
प्रदीप कुमार, लीड बैंक मैनेजर