एटा। वाहनों की फिटनेस करने वाला एआरटीओ कार्यालय खुद अनफिट है। यहां वाहनों की जांच करने वाली फिटनेस पिट ही नहीं हैं। खुले मैदान में काम चलाऊ फिटनेस की जा रही है। व्यवस्था मैनुअल होने के कारण काम चलाऊ ही फिटनेस का कार्य चल रहा है। सच तो यह है कि अनुभव व कागजों के आधार पर ही वाहनों को फिट घोषित कर दिया जाता है। जबकि कुछ वर्ष पूर्व पिट के आधार पर वाहनों का फिटनेस करने के निर्देश दिए गए थे।
बजट के अभाव में लटका पिट
वाहनों की फिटनेस के लिए पिट लगाने के निर्देश के बाद जिले से लाखों रुपये का बजट भेजा गया था, लेकिन बजट न मिलने के कारण यह प्रक्रिया अधर में लटक गई।
नहीं है आरआई की तैनाती
नियम के हिसाब से फिटनेस के लिए एक आरआई की पोस्ट अलग से होती है। जहां आरआई द्वारा वाहनों का परीक्षण कर फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है, लेकिन जिले में वर्षों से आरआई की पोस्ट खाली चल रही है।
ऑनलाइन कटती है रशीद
फिटनेस सर्टीफिकेट के लिए वाहन स्वामियों को ऑनलाइन शुल्क जमा करना होता है। जहां छोटी गाड़ी का छह सौ व बड़ी गाड़ी का आठ सौ रुपये जमा करना होता है।
पिट बनाने के निर्देश दिए गए थे। यहां से बजट बनाकर भेजा गया था। शासन द्वारा बजट की अनुमति नहीं मिली। इस कारण पिट का निर्माण नहीं हो सका। वहीं आरआई की पोस्ट के लिए पत्राचार लगातार किया जा रहा है।
हेम चंद्र गौतम, एआटीओ प्रशासन