वृंदावन (मथुरा)। लापता महंत बाल मुकुंद शरण शास्त्री का अपहरण कर हत्या की गई और शव को मांट क्षेत्र के जंगल में फेंक दिया गया। 13 जून को मांट में मिले शव के फोटो से महंत के भाई और भतीजे ने बाल मुकुंद के रूप में पहचान की है।
अटल्ला चुंगी चौराहा स्थित गोपाल बाग आश्रम के महंत बाल मुकुंद शरण शास्त्री के लापता होने के 24 दिन बाद नया मोड़ आया है। 13 जून को मांट क्षेत्र में मिले साधु के शव की पहचान पुलिस ने महंत के भाई रामवीर, भतीजे विपनेश व उनके पैतृक गांव बदायूं जिले के बसई गांव निवासी प्रधानपति सहित आधा दर्जन लोगों से कराई है। परिजनों ने शव की पहचान मांट पुलिस द्वारा जारी पोस्टर और मौके पर दिखाए गए एक फोटो से की है, जिसमें महंत का मुंह जलाया गया प्रतीत हो रहा है।
वहीं पुलिस महंत के ड्राइवर मूलरूप से नौहझील के गांव गढ़ी कोलाहार निवासी उमेश पाठक की तलाश में लगी है। वहीं ड्राइवर के साथ और किन लोगों की इस मामले में संलिप्तता है। इसके लिए फिर से पुलिस नगर के कई क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। ड्राइवर पर हत्या करने के शक के साथ उसकी कुंडली खंगालने में लगी है।
कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार का कहना है कि मांट पुलिस को मिले एक साधुवेश धारी के शव की पहचान महंत के रूप में कर ली है। इस मामले में अब ड्राइवर, डस्टर गाड़ी और बंदूक की तलाश की जा रही है।
परिजनों का लापता ड्राइवर पर शक
महंत के भाई रामवीर का कहना है कि मेरे भाई का अपहरण कर हत्या की गई और उसके बाद उसे मांट क्षेत्र के जंगल में फेंक दिया गया। यह कार्य किसने और क्यों किया इसका पता पुलिस को लगाना चाहिए। उन्होंने घटना के बाद से लापता ड्राइवर उमेश पाठक पर शक जताया है। इसके पीछे कोई बड़ी साजिश होने की आशंका जाहिर की है।
ड्राइवर का पुलिस ने किया था 151 में चालान
अटल्ला चुंगी के निकट गोशाला नगर स्थित हरेराम हरेकृष्ण आश्रम के महंत से हुए विवाद में पुलिस ने एक माह पूर्व शांति भंग के मामले में ड्राइवर उमेश पाठक को कार्रवाई की थी। तब इसने पुलिस को अपना पता हरेरामहरेकृष्ण आश्रम का दर्ज कराया था। यह वृंदावन में पिछले तीन वर्ष से रहा था।