नगर निगम एक ओर सफाई अभियान का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर निगम के कर्मचारी शहर को गंदा कर रहे हैं। शहर से निकला कूड़ा कुबेरपुर स्थित खत्ताघर पहुंचाने के बजाए शहर में ही डंप कर दिया जाता है।
नगर निगम के कर्मचारियों की कारस्तानी देखने के लिए इधर-उधर जाने की जरूरत नहीं है। आगरा-मथुरा रोड पर मानसिक आरोग्यशाला के पीछे और केंद्रीय कारागार की दीवार से सटे मैदान को खत्ताघर बना दिया गया है। शहर में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद निकला सैकड़ों ट्रक मलवा यहां डाल दिया है। साथ ही वर्षों से सालिड वेस्ट भी यहां खपाया जा रहा है। यही नहीं आरटीओ आफिस के पास रेल लाइन के किनारे भी पिछले कई वर्षों से कूड़ा डाला जा रहा है।
जमकर डीजल चोरी
आगरा। शहर में कूड़ा खपाने का यह गोरखधंधा डीजल चोरी के लिए किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो नगर निगम में करीब 35-40 ट्रैक्टर, 28-30 ट्रक और डंफर हैं। खत्ताघर तक कूड़ा ले जाने के लिए एक ट्रक को लोहामंडी से 08 लीटर, रकाबगंज, शाहगंज से 09 लीटर डीजल मिलता है। इसी तरह ट्रैक्टरों से भी 6-7 लीटर तक डीजल उपलब्ध कराया जाता है लेकिन अफसरों की मिलीभगत से कर्मचारी इस डीजल में ‘घोटाला’ कर जाते हैं।
उधर कुछ ट्रैक्टर चालकों का कहना है कि खत्ताघर कूड़ा ले जाने के लिए डीजल दिया ही नहीं जाता है। केवल दिन में जो सफाई कार्य होता है उसका डीजल मिलता है। इसमें भी सेटिंग का खेल चलता है।
एनजीटी की सख्ती बाद नहीं सुधरे
आगरा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना के किनारे कचरा खपाने पर नगर निगम पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। लेकिन फिर भी निगम के अधिकारियों में सुधार नहीं है।
दीपावली पर और बढ़ेगा कूड़ा
आगरा। शहर में प्रतिदिन करीब 750 से 800 मीट्रिक टन तक कूड़ा जनरेट होता है। दीपावली के सीजन में शहर में करीब 25-30 प्रतिशत कूड़ा और बढ़ जाएगा।
शहर से निकले कूड़े को कुबेरपुर स्थित खत्ताघर तक पहुंचना स्वास्थ्य विभाग और एमएंडटी की जिम्मेदारी है। यदि कूड़ा ऐसे ही शहर में खपाया जा रहा है तो यह बेहद गलत बात है। कल उस स्थान को दिखवाउंगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अनिल कुमार, उप नगर आयुक्त