जन्माष्टमी पर अस्पताल में जन्मे शिशु।
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संतान की प्राप्ति...परम सौभाग्य। दिन भी जन्माष्टमी। इस शुभ दिन को अस्पतालों में 371 बालक-बालिका जन्में, जिन्हें परिजन कृष्ण और राधा का स्वरूप मान रहे हैं। कुछ तो ऐसे दंपती हैं, जिन्हें कई साल बाद पहली बार माता-पिता बनने का सुख मिला है। इस खुशी से उनकी आंखें ही छलक आईं। बोले- भगवान ने तो हमारा घर खुशियों से भर दिया है। कई अभिभावकों ने शिशुओं के नाम कान्हा-राधिका रखने की बात भी कही।
जिले में 132 मेटरनिटी होम और 80 से अधिक सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें जन्माष्टमी के दिन 371 शिशुओं का जन्म हुआ है। लेडी लॉयल, एसएन मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में तो जन्माष्टमी के दिन संतान होने पर जश्न भी मनाया। महिला जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षिक डॉ. रचना गुप्ता ने बताया कि जन्माष्टमी पर प्रसव के लिए उत्साह रहता है। इसके लिए अस्पताल में तैयारी भी कर रखी थी।
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह ने बताया कि सिजेरियन के दो मामलों में तो दंपती ने जन्माष्टमी का ही दिन चुना। सीएमओ डाॅ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 371 शिशुओं का जन्म हुआ है। इसमें 193 बालक और 178 बालिकाएं हैं।