आगरा के खेरागढ़ में बस के टूटे फर्श से गिरकर हुई छात्र की मौत का मामला तो बानगी है, आरटीओ ने शहर में ही चेकिंग अभियान दिखाकर आरटीओ ने देहात के स्कूलों की बसों की जांच तक नहीं की।
जबकि जिले में हर तीसरी बस खटारा है और फिटनेस प्रमाणपत्र न होने के बाद भी फर्राटा भर रही हैं। वाहन संचालक आरटीओ अधिकारियों की शह से कई सालों से जर्जर बसें चला रहे हैं, जो 15 नहीं, बल्कि 20 से 25 साल तक पुरानी हैं।
ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी ने 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के संचालन पर रोक लगा रखी है। ऐसे में शहर से जो बसें और वाहन हटाए गए, उन्हें कस्बों और देहात के स्कूल संचालकों ने खरीदकर चलाना शुरू कर दिया।
अनफिट बस
- फोटो : अमर उजाला
ज्यादातर बसें दूसरे राज्यों की है, जिनका न तो रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है और न ही इनका फिटनेस सर्टिफिकेट ही जारी किया गया। जर्जर बसों के जरिये मासूम बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले स्कूल संचालक गली हुई बसों का भी मोटा किराया वसूल रहे हैं।
खटारा स्कूल वैन, बसों में तय संख्या से ज्यादा बच्चों को ले जाने पर अभिभावक भी विरोध दर्ज नहीं कराते। अभिभावक अगर बसों की जर्जर दशा पर विरोध जताते हुए बच्चों को भेजना बंद करेंगे तो स्कूल भी संचालन में सुधार करने को मजबूर होगा।
बस की हालत पर अभिभावक भी नजर नहीं डालते और न ही पेरेंटस टीचर मीटिंग में इसकी शिकायत करते हैं। जिन स्कूलों में अभिभावकों ने बसों और ड्राइवरों की शिकायत की, उन पर कई बार कार्रवाई भी हुई है।
इन मानकों पर तो ध्यान ही नहीं
- स्कूल बस की बॉडी और फ्लोर गला न हो
- चारों टायर कटे-फटे और घिसे नहीं हों
- स्पीड गवर्नर लगा हो, स्टेपनी अवश्य हो
- शीशे लगे हों, बाहर पाइप ग्रिल भी लगी हो
- बसों में फर्स्ट एड बाक्स और दवाएं हों
- चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस हो
- लाइटें, इंडीकेटर, रिफ्लेक्टर ठीक होने चाहिए
- लो फ्लोर बसों में रेलिंग, सीढ़ी नीची हों
- प्रदूषण नियंत्रण और फिटनेस प्रमाणपत्र हो
982 हैं आगरा में स्कूल बसें
327 बसें हो चुकी हैं खटारा
15 साल पुरानी बसें दौड़ रहीं
32 फीसदी बसों की फिटनेस जांच नहीं
56 वाहनों का मंगलवार को चालान