बच्चों व किशोरों में टाइप-1 मधुमेह बढ़ रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज में हर सप्ताह 3 से 5 नए मरीज आ रहे हैं। इनका यहां निशुल्क इलाज हो रहा है। इन्हें इंसुलिन देनी पड़ रही है। बच्चों में बढ़ती इस बीमारी से चिकित्सक चिंतित हैं। ऐसे में ओपीडी सप्ताह में दो दिन करने की तैयारी चल रही है।
मधुमेह ओपीडी प्रभारी डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि हर शुक्रवार को ओपीडी कॉम्प्लेक्स-दो में मधुमेह ओपीडी चल रही है। इसमें 281 मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 276 बच्चे हैं, जिनमें 271 बालक और 5 बालिकाएं हैं। इनकी उम्र एक से 16 साल तक है। इनमें ऑटो इम्युन बीमारी के कारण इंसुलिन नहीं बन रही है। इससे टाइप-1 मधुमेह हो रही है। ऑटो इम्युन बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता विपरीत कार्य करने लगती है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को हमला कर नष्ट कर देती हैं। इस बीमारी में थकान, जोड़ों में दर्द और सूजन, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, बेवजह हल्का बुखार होने और वजन कम होने लगता है।
मुंह सूखे, बार-बार प्यास लगे तो कराएं जांच
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि टाइप-वन मधुमेह में प्रतिरक्षा प्रणाली अग्नाशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इससे इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। ऐसे में मरीज को इंसुलिन दी जाती है। इसमें बच्चों-किशोरों में अधिक होती है। मुंह सूख रहा है, बार-बार प्यास लगने, बार-बार पेशाब आना, भूख अधिक लगने की दिक्कत है तो ये टाइप-वन मधुमेह का खतरा है। ऐसे में जांच जरूर करा लेनी चाहिए।