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यूपी: 300 करोड़ की जमीन हथियाने के लिए फर्जी वसीयत, एसआईटी जांच में सबसे बड़ा खुलासा; दो गिरफ्तार

Tue, 25 Feb 2025 08:51 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

करोड़ों की जमीन पर कब्जा करने के लिए फर्जी वसीयत बनाई गई। एसआईटी की जांच में हुआ खुलासे के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। 
 
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आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के थाना सदर तहसील में फर्जी बैनामा कांड की जांच कर रही एसआईटी ने डौकी के बाबा मुंशीदास की 300 करोड़ रुपये से अधिक की जमीनों की फर्जी वसीयत कराने का खुलासा किया है। आरोपियों ने बाबा मुंशीदास की पहली पत्नी के बेटे राजकुमार के साथ मिलकर साजिश रची थी। फर्जी वसीयत को तहसील के रिकाॅर्ड रूम में जमा भी करा दिया था। 
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पुलिस ने तहसील के संविदाकर्मी चित्र सिंह और बाबा के बेटे राजकुमार को गिरफ्तार किया है। तहसील सदर में जमीनों का फर्जी बैनामा करके उन्हें कब्जाने वाले गिरोह का पिछले दिनों खुलासा किया गया था। इस पर प्रशासन की ओर से 21 जनवरी को शाहगंज थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया था। बैनामों की जांच के लिए एसीपी सदर विनायक भोंसले के नेतृत्व में बनाई एसआईटी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया था। बाबा मुंशीदास की दूसरी पत्नी उर्मिला देवी ने पति के नाम से फर्जी प्रपत्र बनाने की शिकायत की। 

 

बाबा मुंशीदास की वर्ष 2017 में आश्रम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एसीपी ने बताया कि एसआईटी को छानबीन में पता चला कि बाबा मुंशीदास की पहली पत्नी राजवती उर्फ विमला देवी से एक बेटा राजकुमार है। वह पढ़ने देहरादून चला गया। मां राजवती भी साथ चली गई थीं। उसके बाद बाबा मुंशीदास ने आश्रम में रहने वाली उर्मिला से दूसरी शादी कर ली। उर्मिला देवी से उन्हें पांच बच्चे हैं। मुंशीदास ने अपनी वसीयत में फोटाे उर्मिला देवी का लगाया। 


 

उन्होंने वसीयत में राजवती उर्फ विमला देवी उर्फ उर्मिला का नाम लिखा था। यह वसीयत फतेहाबाद तहसील के रिकाॅर्ड रूम में थी। मुंशीदास की हत्या के बाद दोनों पत्नियों में विवाद चल रहा था। वसीयत में किसी एक का नाम नहीं होने के चलते दोनों ही जमीन को नहीं बेच पा रहे थे। पहली पत्नी के बेटे राजकुमार से फर्जी बैनामा करने वाले गिरोह के सरगना अजय सिसौदिया और प्रशांत शर्मा ने मुलाकात की। उसके साथ मिलकर फर्जी वसीयत तैयार करने की साजिश रची।

 
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बाबा मुंशीदास की असली वसीयत से पहले की फर्जी वसीयत तैयार की। जिसमें पहली पत्नी राजवती और बेटे राजकुमार को उत्तराधिकारी बनाया था। वसीयत तैयार करने के बाद सदर तहसील के निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड रूम में दर्ज करा दिया। एसीपी सदर ने बताया कि मामले में राजकुमार और तहसील के निजी कर्मचारी चित्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है।
 
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