दो महीने पहले जिन दमकल एंबुलेंस को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हरी झंडी दिखाई, वो एक बार भी किसी मरीज के काम नहीं आईं। इनके लिए अलग से ड्राइवर ही तैनात नहीं किया गया है। न तो फर्स्टएड किट है और न ही आक्सीजन की व्यवस्था, नर्सिंग स्टाफ भी नहीं है।
आगरा अग्निशमन विभाग को सात एंबुलेंस दो महीने पहले दी गई थीं। इनका मकसद है, इनकी मदद से आग में झुलसे लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना। लेकिन इसकी व्यवस्था ठीक से नहीं हो पाई। विभाग के पास स्टाफ की पहले से ही कमी है। अब एंबुलेंस भला कौन चलाए? विभाग के ड्राइवर दमकल चलाएं या एंबुलेंस। गनीमत यह रही कि दो महीनों में एक बार भी रेस्क्यू आपरेशन के लिए इन एंबुलेंस की जरूरत नहीं पड़ी। अगर कहीं आग से झुलसे लोगों को इन एंबुलेंस से अस्पताल ले जाने की नौबत आई, तो बहुत ही मुश्किल होगी। वैसे भी ये सिर्फ नाम की एंबुलेंस हैं। इनमें वो सुविधाएं नहीं हैं, जो किसी गाड़ी को एंबुलेंस बनाती हैं।
ऐसी होना चाहिए एंबुलेंस
ट्रामा एंबुलेंस
- यह मिनी आईसीयू की तरह होती है
- आक्सीजन और वेंटिलेटर होना जरूरी
- स्पेशलिस्ट डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ अनिवार्य
सामान्य एंबुलेंस
- स्ट्रेचर और फर्स्टएड किट होना जरूरी
- आक्सीजन की व्यवस्था होनी चाहिए
- नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी आवश्यक
( सीएमओ डा. बीएस यादव के मुताबिक)
दमकल एंबुलेंस
- एंबुलेंस के लिए ड्राइवर तैनात नहीं
- न आक्सीजन है, न फर्स्ट एड किट
- नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था भी नहीं है
( दमकल से मिली जानकारी)
आगरा के लिए सात एंबुलेंस मिली हैं, इनके लिए अलग से ड्राइवर और नर्सिंग स्टाफ तैनात नहीं किया गया है, लेकिन रेस्क्यू आपरेशन की जरूरत पर चालक लगाए जाएंगे।
- यशवीर सिंह (मुख्य अग्निश्मन अधिकारी, आगरा)
...तो इसलिए चल रहीं प्राइवेट एंबुलेंस
(फोटो एसएन के सामने खड़ी एंबुलेंस)
समाजवादी एंबुलेंस के अलावा जननी सुरक्षा के लिए एंबुलेंस अलग से चल रही है। इनके अलावा स्वास्थ्य विभाग के पास अपनी एंबुलेंस भी हैं। इसके बावजूद एसएन मेडिकल के सामने प्राइवेट एंबुलेंस की लाइन लगी रहती है। इसकी वजह यही है कि सरकारी एंबुलेंस का संचालन ठीक से नहीं किया जा रहा।