चिकनपॉक्स की बीमारी की जांच करते चिकित्सक
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गर्मी से वायरल इन्फेक्शन के मामले बढ़ रहे हैं। उल्टी-दस्त के बाद अस्पतालों में चिकनपॉक्स के मरीज भी आ रहे हैं, जिसे आमतौर पर छोटी माता भी बोला जाता है। एसएन मेडिकल कालेज की ओपीडी में सात मरीज आए हैं।
एसएन की बाल रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले सभी मरीज 10 साल से कम उम्र के हैं। बीमारी होने के दो-तीन दिन बाद दाने उभरने पर ही लोग मरीज को लेकर पहुंचते हैं।
एसएन के बाल रोग विभाग के डॉ. रामक्षितिज शर्मा बताते हैं कि ओपीडी में चिकनपॉक्स के मरीज आने लगे हैं। बीमारी होने के दो-तीन दिन बाद लक्षण नजर आने पर ही इसका पता चलता है। उपचार देने के साथ तीमारदारों को बचाव और सावधानी के बारे में बताया जा रहा है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कात्याल ने बताया कि वायरल इन्फेक्शन के चलते शरीर पर असंख्य दाने हो जाते हैं। गले में और पेट में भी दाने हो जाते हैं। असहनीय दर्द और तेज बुखार रहता है।
यह है वजह
चिकनपॉक्स वेरीसेला जोस्टर वायरस से होती है। शरीर में लाल दाने फुंसी के रूप में उभर आते हैं। सबसे पहले चेहरे और पीठ पर, इसके बाद पूरे शरीर पर दाने उभरने लगते हैं। इसमें तेज बुखार के साथ शरीर और सिरदर्द रहता है। सांस लेने में तकलीफ, उबकाई आने के अलावा कमजोरी महसूस होती है।
ये बरतें सावधानी
- घर से कम निकलें, रोगी के आसपास साफ-सफाई रखें।
- मरीज की तौलिया का उपयोग न करें।
- ठंडे पानी ओर खट्टे फल, खटाई से बचें।
- मसालेदार, नमक-चिकनाईयुक्त भोजन का उपयोग न करें।
- गाजर का जूस, तरबूज, किवी, नाशपाती खाएं, खूब पानी पिएं।
- बीमारी के तीन-चार दिन बाद नीम के पानी से नहलाएं।