ताज महोत्सव में शिल्पग्राम के मुक्ताकाशीय मंच पर शुक्रवार की रात कलाकारों ने ओडिशा के छाऊ नृत्य की झलक दिखाई। नृत्य ने दर्शकों को झुमाया तो साधो बैंड ने लोकगीतों की धुन पर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
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शाम को ग्वालियर की हर्षिता जादौन ने कथक प्रस्तुत किया तो लखनऊ की सीमा मोदी ने सूफी नृत्य पेश किया। ओडिशा के उत्तर साही नीचूपाड़ा से आए दल ने छाऊ नृत्य दिखाया। इसके बाद सुजीत ओझा ने भजन पेश किए। रात में साधो बैंड की प्रस्तुति सबसे खास रही। इनमें लोकगीतों की मूल धुनों को पेश किया गया।
इस दल में 9 सदस्य हैं, जो असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल, कश्मीर और ओडिशा के लोकगीतों को प्रस्तुत करते हैं। राज्यों के लोकगीतों की सांस्कृतिक विविधता को उन्होंने शिल्पग्राम के मंच पर प्रस्तुत किया।
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सदर बाजार के मुक्ताकाशीय मंच पर शाम को कवि सम्मेलन हुआ। इसमें वैभव सिंघल, सलीम अहमद, शैलेंद्र अग्रवाल, शाहिद नदीम, राकेश शर्मा, शशि गुप्ता, अशाक बंसल, रामा वर्मा, असलम खान ने काव्य पाठ किया। रात में फर्रुखाबाद के मतलूब नियाजी कव्वाल ने कव्वाली पेश की।