छठ पर्व के दूसरे दिन गुरुवार को व्रती महिलाओं ने खरना की पूजा की। सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जल व्रत रखा। षष्ठी पूजन के लिए प्रसाद तैयार किया। इस दौरान छठ मैया के गीत ‘पहिले-पहिल हम कईनी हे छठी मइया बरत तोहार, करिहा क्षमा हे छठी मइया भूल-चूक हमार’ व ‘गोड़े-मूड़े तनबो चदरिया, फल मंडी जइबो जरूर, सांझे बेरा देबो अरघिया, भोरे मांगब अशीष’ आदि गीत गाए।
खरना पर शाम को पूजन के बाद व्रतियों ने ईंट व मिट्टी से बने चूल्हे पर खीर बनाई। पूजा स्थल की सफाई की। केले का पत्ता बिछाकर उस पर अर्द्ध चंद्र की आकृति बनाई और सिंदूर लगाकर उसके पास दीपक जलाया। संतान और पति के लिए अग्रासन निकाला गया।
चंद्रमा और छठ मैया की पूजा करने के बाद खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद से ही षष्ठी का व्रत शुरू कर दिया। व्रती अब 21 नवंबर को सुबह उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलेंगी। यमुनापार, नौबस्ता, बल्केश्वर, कमला नगर, नामनेर, लोहामंडी आदि क्षेत्रों में व्रती महिलाओं ने मिलकर पूजन किया। तेज नगर कमला नगर में खरना पर महिला व्रतियों ने पूजा की। खीर बनाकर खाई। षष्ठी पूजन के लिए प्रसाद बनाया। पूजन में गीता देवी, रूपा, नीलम, पुष्पा, मीना देवी, क्रांति देवी मौजूद रहीं।