छठ महोत्सव पर्व रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। चार दिवसीय महोत्सव को लेकर पूर्वांचल और बिहार के लोग उत्साहित हैं। घरों में महोत्सव को लेकर तमाम तैयारियां चल रही हैं। शुरूआत के दो दिन घरों में पूजा होगी। 17 और 18 नवंबर को घाटों पर श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचेंगे। 17 को अस्ताचलगामी और 18 को उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
शास्त्री नगर निवासी पंडित वाईके शर्मा के मुताबिक सूर्य षष्ठ व्रत सुहागिन महिलाएं और पुरुष करते हैं। इसमें पंचमी से सप्तमी दिन का उपवास किया जाता है। पंचमी (खरना) के दिन शाम को बिना नमक वाला भोजन किया जाता है। अधिकतर लोग खीर का सेवन करते हैं। षष्ठी को पूरे दिन जल ग्रहण नहीं किया जाता।
शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर फल, पकवान, पुष्प आदि सूर्य भगवान को अर्पित किए जाते हैं। निराहार और रात भर जागरण करने के बाद दूसरे दिन सूर्योदय के पूर्व नदी और सरोवर में स्नान करके उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व मुख्य रूप से यह भोजपुर क्षेत्र का त्योहार माना जाता है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे देश के साथ विदेशों में भी यह पर्व मनाया जाने लगा है। आगरा में दिनोंदिन पर्व को मनाने वालों की संख्या बढ़ रही है। यमुना जी के घाटों पर छठ पूजन के लिए भीड़ उमड़ने लगी है। पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के महामंत्री अभिमन्यु सिंह ने बताया कि नहाय-खाय पर व्रती महिलाएं चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी खाएंगी। इसका सेवन शुद्धिकरण के लिए किया जाता है। शुद्ध होने के बाद ही छठ पूजन की तमाम तैयारियां की जाती हैं।
छठ पूजा का लाभ
आगरा। छठ मैया का व्रत रोगों से मुक्ति पाने और संतान की सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए रखा जाता है। सच्चे मन से व्रत रखने पर मैया मनोकामना जरूर पूरी करती हैं। जिसकी मनोकामना पूरी होती है वह कोसी भरते हैं। बहुत से लोग दंडवत करते हुए घाटों पर पहुंचते हैं। व्रत रखने वालों की सेवा करने वालों को भी बहुत लाभ मिलता है।
घाट पर सफाई नहीं
आगरा। पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अभिमन्यु सिंह ने बताया कि शनिवार को वह रामघाट देखने पहुंचे। बड़ी संख्या में लोग घाट पर पूजा के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अभी तक सफाई नहीं हुई है।