आगरा के पिनाहट ब्लॉक में भूमि संरक्षण के लिए आए 22 हजार रुपये में किए गए गोलमाल की जांच विजिलेंस ने अब पूरी कर ली है। 1992 के इस मामले में 23 साल बीत जाने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई है।
इसमें कुल 19 आरोपी बनाए गए थे लेकिन जांच पूरी होने तक 14 बचे हैं। पांच की मौत हो चुकी है। अभी यह मामला कोर्ट में पहुंचा है। अब आरोप तय किए जाएंगे। इसके बाद अदालत में केस चलेगा।
1991 में भूमि संरक्षण के लिए सरकार से अनुदान मिला था। इसकी बंदरबाट हो गई। तभी शिकायत कर दी गई। पहले प्रशासन ने जांच कराई। इसके बाद मामला विजिलेंस को सौंपा गया। 2008 में केस दर्ज किया गया।
तब 19 आरोपी बनाए गए। इसके बाद विजिलेंस की लंबी जांच शुरू हुई। कभी इसका बयान तो कभी उसका। कभी आरोपी बनाने के लिए शासन से अनुमति तो कभी गिरफ्तारी की अनुमति के लिए।
इस बीच एक एक कर तमाम आरोपी सेवानिवृत्त्त हो गए। पांच की मौत हो गए। 14 की गिरफ्तारी केलिए प्रयास किए गए लेकिन वे हाथ नहीं आए। 12 के खिलाफ तो कोर्ट से कुर्की का वारंट मिला। तब वे कोर्ट में पेश हुए। सभी की पेशी हो जाने केबाद उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
सीकरी के घोटाले में 33 साल चली जांच
फतेहपुर सीकरी में मंडी के लिए जमीन का अधिगृहण किए जाने के मामले में गोलमाल हुआ 1984 में। इसमें चार्जशीट हाल ही में दाखिल की गई है। 17 आरोपी बनाए गए थे। 16 की मौत हो चुकी है। सिर्फ एक ही जीवित है।
उनकी उम्र 80 साल है। उनके खिलाफ भी कोर्ट से कुर्की पूर्व वारंट मिला। वह बाग फरजाना के रहने वाले हैं। विजिलेंस ने उनके घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
शासन से अनुमति मिलना आसान नहीं
विजिलेंस की जांच में देरी की सबसे बड़ी वजह शासन से अनुमति मिलना होती है। हाल के कई केस में यह बात सामने आई है। पशु पालन विभाग में 2007 से 2015 के बीच हुए घोटाले में भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुमति नहीं मिल पा रही है।
आरोपियों में पूर्व मंत्री अवधपाल शामिल हैं। अगर किसी को आरोपी बनाने के लिए अनुमति मिल जाए तो विजिलेंस को साक्ष्य जुटाने होते हैं। इसकेबाद गिरफतारी से पहले भी अनुमति लेनी होती है।