रक्षाबंधन के बाद रविवार को घर लौटने वाली भीड़ ने आगरा के बस अड्डों और रेलवे स्टेशन पर व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। बसों में सीट के लिए धक्का-मुक्की और खिड़की से बच्चों को प्रवेश कराने के दृश्य दिखे, जबकि ट्रेनों में यात्री दरवाजों पर लटककर सफर करते नजर आए।
आगरा में रक्षाबंधन के बाद रविवार को घर लौटने वाले यात्रियों की भारी भीड़ से बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर व्यवस्थाएं चरमरा गईं। यात्रियों को बसों और ट्रेनों में चढ़ने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और कई स्थानों पर इंतजामों की पोल खुल गई।
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ईदगाह, आईएसबीटी, रामबाग और सैटेलाइट बस अड्डों पर यात्रियों को बस में जगह पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। कई यात्री खिड़कियों से बसों में घुसे, जिनमें महिलाएं अपने बच्चों को अंदर पहुंचाती दिखीं। सीट के लिए धक्का-मुक्की हुई और जगह न मिलने पर कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली समेत कई स्थानीय मार्गों पर बसों के फेरे बढ़ाए गए थे। उन्होंने कहा कि भीड़ के दबाव से ऐसी स्थिति बन जाती है। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर भी यही हाल रहा। प्लेटफॉर्म यात्रियों से खचाखच भरे थे। ट्रेन आते ही कोच में घुसने के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कई यात्री ट्रेन के दरवाजे से लटककर यात्रा करते नजर आए। स्टेशन पर लगातार तीसरे दिन बैग स्कैनर खराब रहा।
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बस अड्डों पर अव्यवस्था
ईदगाह बस अड्डे पर गंदगी फैली थी और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। आईएसबीटी पर यात्रियों की मदद के लिए बनाई गई हेल्पलाइन पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बसों के आने-जाने की जानकारी देने वाला डिस्प्ले भी बंद पड़ा रहा। रविवार को कुल 539 बसें संचालित की गईं, जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दोगुनी थीं। सैटेलाइट बस अड्डे पर भी हाथरस और अलीगढ़ जाने वाली बसों में भारी भीड़ रही।
रेलवे स्टेशन पर भी भीड़ का दबाव
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म पर पैर रखने की जगह नहीं थी। प्रतीक्षालय भी यात्रियों से भर गए थे, जिससे कई यात्री फर्श पर लेटकर इंतजार करते दिखे। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए तीन जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों की भीड़ ज्यादा होने पर कभी-कभार दबाव बढ़ जाता है।