मौसम में बदलाव के दौरान नवजात शिशुओं में संक्रमण, सर्दी, बुखार और डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि शिशु को सीधे कूलर या एसी की हवा से बचाएं, केवल मां का दूध पिलाएं और शुरुआती 42 दिनों तक संक्रमण से विशेष सुरक्षा रखें।
मौसम में आ रहे बदलाव और तापमान के उतार-चढ़ाव का सबसे ज्यादा असर नवजात शिशुओं पर देखने को मिल सकता है। बदलते मौसम में जरा सी भी लापरवाही मासूमों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय नवजातों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर होती है, जिससे वे सर्दी, खांसी, बुखार और डायरिया की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। साथ ही नवजात शिशुओं में संक्रमण (इन्फेक्शन) का खतरा तेजी से बढ़ने का डर है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए बदलते मौसम में उनका विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू ने बताया कि अक्सर देखने में आता है कि गर्मी और उमस से बचाने के लिए माता-पिता नवजात को सीधे कूलर की हवा के संपर्क में रख देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। शिशुओं को सीधे कूलर या एसी के सामने न सुलाएं। इसके साथ ही, जन्म से लेकर सवा महीने (42 दिन) तक नवजात के कमरे में बाहरी या ज्यादा लोगों का आना-जाना नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का डर सबसे ज्यादा रहता है।
संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टर की जरूरी सलाह
कमरे में नो-एंट्री: शुरुआती 42 दिनों (सवा महीने) तक नवजात के कमरे में ज्यादा लोगों को न आने दें।
हाथ धोकर ही छुएं: शिशु को गोद में लेने या छूने से पहले हाथों को साबुन से धोएं या सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
केवल मां का दूध: बदलते मौसम में नवजात को पानी, शहद या घुट्टी बिल्कुल न दें, केवल स्तनपान कराएं।
धूप में सूखे कपड़े: बच्चों को हमेशा साफ-सुथरे और धूप में अच्छी तरह सुखाए गए कपड़े ही पहनाएं।
गीले कपड़ों से बचाव: बच्चे के कपड़ा गीला करते ही उसे तुरंत बदलें, ताकि फोड़े-फुंसी और रैशेज का खतरा न रहे।