आगरा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद में कक्षा 9 से 12 तक हिंदी शिक्षा के स्वरूप में बदलाव की तैयारी की जा रही है। नए पाठ्यक्रम से छात्रों को रटने के बजाय रचनात्मक और व्यावहारिक रूप से हिंदी सिखाने पर जोर रहेगा।
प्रस्तावित योजना के तहत हिंदी पाठ्यक्रम में रचनात्मक लेखन, अभिव्यक्ति और भाषा के व्यावहारिक उपयोग को प्रमुखता दी जाएगी। इसमें कविता लेखन, कहानी लेखन, निबंध लेखन, संवाद लेखन जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों की सोचने, समझने और अभिव्यक्त करने की क्षमता विकसित हो सके। संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में बच्चों की पढ़ने और लिखने की आदतें कमजोर हो रही हैं। ऐसे में पाठ्यक्रम में रचनात्मक गतिविधियों को शामिल करना बेहद जरूरी है, जिससे छात्रों में पठन-पाठन और लेखन कौशल का विकास होगा। जीआईसी के प्रधानाचार्य मानवेंद्र सिंह ने कहा कि आज के समय में छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देना आवश्यक हो गया है। हिंदी पाठ्यक्रम में बदलाव से छात्रों को भाषा का वास्तविक और उपयोगी ज्ञान मिलेगा।