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बाह के सात गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा

Tue, 23 Aug 2016 01:21 AM IST
बाह के सात गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा
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बाह के सात गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कोटा बैराज, झालाबाड़ बांध से छोडे़ गये दो लाख 33 हजार क्यूसेक पानी और सागर बांध से छोड़े गए एक लाख क्यूसेक पानी के चलते चंबल नदी का जलस्तर सोमवार शाम तक 129 मीटर के लेबिल पर पहुंच गया है। इससे बाह के सात गांव गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, झरनापुरा, मऊ की मढै़या, डालपुरा का तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है। जलस्तर लगातार बढ़ते देख नदी किनारे के अन्य गांवों में हड़कंप मच गया है। लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर जाना शुरू कर दिया है। 
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चंबल नदी में एक लाख क्यूसेक पानी सागर बांध, कोटा बैराज और झालाबाड़ बांध से दो लाख 33 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के चलते तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। बाह के गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढै़या, डालपुरा, झरनापुरा चौतरफा पानी से घिर गये हैं। इनका तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है। खेड़ा राठौर से गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा के लिए नावों का संचालन जलमग्न सड़क और खेतों से होकर किया जा रहा है। इससे गांव के बाहर के लोगों को गांव तक और अंदर फंसे लोगों को बाहर तक लाया जा रहा है। इसके अलावा तटवर्ती गांव जेबरा, कुुंवर खेड़ा, भगवानपुरा, महुआशाला, चीकनीपुरा, नन्दगवां, पुरा शिवलाल और पिनाहट के रेहा, बरेण्डा, कछियारा, करकौली पुरा, उमरैठा पुरा, बीच का पुरा, हरलाल पुरा, मलापुरा, गोहरा, भटपुरा आदि में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। इन गांवों के बीहड़ी रास्ते और निचले इलाके की खेती जलमग्न हो गई है। पिनाहट घाट पर पानी का जलस्तर 129 मीटर तक पहुंच गया है। जलस्तर खतरे के निशान 132 मीटर के उस पार तक पहुंचने की आशंका के चलते हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीण रात भर जाग कर जलस्तर पर नजर रखने को मजबूर हो गये हैं। एसडीएम विनय कुमार सिंह ने बताया कि नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। हाई अलर्ट जारी कर लेखपालों को गांव में ही रुकने के निर्देश दिये गये हैं।
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खेत और सड़क पर चल रही नाव, टापू बने चार गांव  
बाह। चंबल में उफान के चलते बाह के चार गांव गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा और भटपुरा गांव में हालात बिगड़ गये हैं। नदी के पानी से घिरे ये गांव टापू से नजर आ रहे हैं। इन गांवों की सड़क और खेतों में सोमवार से नाव चल रही है। लोगों को नाव की पतवार का सहारा लेना पड़ रहा है। कोई बीमार हो जाये या दूध, सब्जी आदि जरूरी चीजें लाने ले जाने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है। सड़क और निचले इलाके के झोपडीनुमा घर जलमग्न हो गये हैं। खेतों में खड़ी फसलें, नलकूप और पेड़ जलमग्न हो गये हैं। एसडीएम विनय कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए सोमवार से नाव का संचालन शुरू किया गया है। 
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