बाह के पास मध्यप्रदेश की सीमा से सटे बासौनी के जेवरा गांव में चंबल का बीहड़ शनिवार को धधक उठा। दोपहर में आग के दावानल बनने से पक्षियों के घरौंदे जलकर नष्ट हो गये। वन्यजीवों में भगदड़ मच गयी। तीन किमी के दायरे में फैली आग पर देरशाम तक काबू नहीं पाया जा सका था। वन कर्मी और अग्निशमन कर्मी आग बुझाने में जुटे हुए थे।
चंबल नदी के किनारे बसे बाह के जेवरा गांव में शनिवार की सुबह आग लगने से लकड़ी बीनने वाले और चरवाहे भाग निकले। बीहड़ से आग की लपटे उठने की सूचना पर हरकत में आया वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच गया। फायरब्रिगेड को भी बुला लिया। लेकिन आग वाले इलाके में दमकल नहीं पहुंच सकी। अग्निशमन कर्मी और वन कर्मी ग्रामीणों की मदद से आग बुझाने में जुट गये। बीहड़ के इस इलाके में विभिन्न प्रजाति के पक्षियों के घोंसले भी आग की भेंट चढ़ गये। अग्नि प्रभावित क्षेत्र में सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा, सेही, नीलगाय आदि में भगदड़ मच गयी। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो कई वन्य जीव जलकर नष्ट हो गये। दोपहर में आग लगभग तीन किमी के दायरे में फैलने से स्थिति और विकराल हो गई। देरशाम तक आग को बुझाने का क्रम चल रहा था।
पिनाहट के गांव क्यौरी में बिजली के तार में फाल्ट से फूलसिंह और सरनाम सिंह के लगभग 15 बीघा खेत में खड़ी गेहूं की फसल में आग लग गई। ग्रामीणों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन पूरी फसल जलकर राख हो गई। किसानों ने मुआवजे की मांग की है। वहीं, कागारौल के ग्राम गढ़मुक्खा में प्रेम नारायन लवानिया के दो बीघा खेत की गेहूं की फसल में आग लग गई। ग्रामीण जब तक आग पर काबू पाते तब तक सारी फसल जलकर राख हो गई। सूचना पर लेखपाल मौके पर नहीं पहुंचा। इस पर पीड़ित ने शिकायत उपजिलाधिकारी से की है।