मन में आस्था, चेहरे पर भक्ति और लबों पर मातारानी के जयकारे। कुछ ऐसा ही दृश्य शनिवार को देवी मंदिरों में देखने को मिल रहा है। चैत्र नवरात्र शुरू हो गए हैं। भव्य रूप से सजे देवी मां के दरबार पर भक्तों की कतार लगी है। भक्त पहले प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना कर रहे हैं।
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ब्रज में चैत्र नवरात्र को लेकर भक्तों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और एटा-कासगंज स्थित देवी मंदिरों में शनिवार सुबह से ही भक्तों की कतार लग गई। भक्तों ने विधि विधान के साथ माता भगवती के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की।
नवरात्र पर मंगला दर्शन के लिए फिरोजाबाद के प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर पर भक्तों की भारी उमड़ी। यहां भक्तों ने मां कैलादेवी के दर्शन कर पूजा अर्चना की और परिवार के सुख-समृद्धि एवं शांति के लिए मनोकामना की। इस दौरान मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा।
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ये है घट स्थापना का मुहूर्त
पंडित राम वल्लभ भारद्वाज ने बताया कि शनिवार को उदयकालीन प्रतिपदा तिथि में सुबह 07:39 बजे से 8:38 बजे तक शुभ योग और सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक अभिजीत योग में घट स्थापना की जा सकती है। गृहस्थ जनों के लिए प्रथम दोनों मुहूर्त ज्यादा शुभ और उपयुक्त रहेंगे।
मां दुर्गा जी का चित्र स्थापित करें और पूर्व मुखी होकर उनकी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। मां दुर्गा के बाईं ओर सफेद वस्त्र बिछा कर उस पर चावल के नौ कोष्ठक, नवग्रह, लाल वस्त्र पर गेहूं के सोलह कोष्ठ षोडशामृत बनाएं। एक मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बना कर उसके गले में मौली बांध कर उसके नीचे गेहूं अथवा चावल डाल कर रखें।
इसके बाद बाद उस पर नारियल भी रखें। नारियल पर मौली भी बांधे। तेल का दीपक व शुद्ध घी का दीपक जलाए। मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर हल्का सा गीला करके उसमें जौ के दाने डाले, उसे चौकी के बाईं और कलश के पास रखें।