केंद्र सरकार ने एक बार फिर उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापित किए जाने का मामला राज्य सरकार के पाले में डाल दिया है। गृह मंत्रालय ने यूपी उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना जनमंच को खत भेजकर कहा है कि अगर प्रदेश सरकार इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर भेजे तो निर्णय लिया जा सकता है। इस पर अधिवक्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि राज्य से तीन बार पहले ही प्रस्ताव जा चुका है।
सिविल कोर्ट परिसर में की गई मीटिंग में अधिवक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार को पूरा अधिकार है कि वह जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को क्रियान्वित करते हुए खंडपीठ की स्थापना करे। राज्य सरकार की ओर से पत्र ही नहीं, संस्तुति भी की जा चुकी है। केंद्र सरकार टाल मटोल का रवैया अपना रही है। जसवंत सिंह आयोग ने तीन जगह खंडपीठ स्थापना करने की रिपोर्ट दी थी। इनमें महाराष्ट्र और केरल में स्थापना हो चुकी है। राजनीतिक कारणों से आगरा अभी तक खंडपीठ से वंचित है।
जो खंडपीठ की बात करेगा वो लखनऊ में राज करेगा
आगरा। अधिवक्ताओं ने आंदोलन को तेज करने का एलान कर दिया है। उन्होंने नारा दिया है जो हाईकोर्ट खंडपीठ की बात करेगा, वो लखनऊ पर राज करेगा। जनमंच इस नारे के साथ पश्चिमी यूपी में आंदोलन चलाएगा। इसकी शुरुआत 18 जनवरी को बाह तहसील से की जाएगी। विधानसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों से खंडपीठ के लिए संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाएंगे। नई सरकार बनने पर केंद्र सरकार को फिर से प्रस्ताव भिजवाया जाएगा। इसके लिए पश्चिमी यूपी के विधायकों को एकजुट किया जाएगा। मीटिंग में जनमंच के संयोजक चौधरी अजय सिंह, नरेंद्र शर्मा, अचल शर्मा, हरिदत्त्त शर्मा, सरद कुमार लवानियां, राजन सिंह, चौधरी धर्मवीर सिंह, वीरेंद्र फौजदार, उदयवीर सिंह, सतेंद्र कुमार यादव, उदयवीर सिंह चौहान, बलवीर सिंह मौजूद रहे।