संगीत सम्राट स्वामी हरिदास महाराज के लाड़ले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज का प्राकट्योत्सव वृंदावन में धूमधाम के साथ मनाया। बांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवनराज से लेकर बांकेबिहारी मंदिर तक विविध धार्मिक आध्यात्मिक कार्यक्रम हुए। उधर, बांकेबिहारी मंदिर में प्रभु का अभिषेक किया गया।
गुरुवार की सुबह निधिवनराज मंदिर स्थित ठाकुर श्री बांकेबिहारी महाराज की प्राकट्य स्थली में धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए। सुबह 5 बजे सेवायत भीकचंद्र गोस्वामी, रोहित गोस्वामी, बच्चू गोस्वामी, रघु गोस्वामी, मंदिर के प्रबंधक प्रशासन उमेश सारस्वत, मनीष पंडित के साथ ही देश विदेश से आए श्रद्धालुओं द्वारा प्राकट्यस्थली का पंचामृत से महाभिषेक किया गया।
निधिवनराज स्वामी हरिदासजी और उनके आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी के जयकारों से गुंजायमान हो गया। उधर, सुबह 7 बजे मंदिर सेवायतों द्वारा दूध, दही घी, शहद, बूरा और गुलाब जल से ठाकुरजी का अभिषेककिया गया। इसके बाद ठाकुर बांके बिहारी महाराज ने पोशाक धारण कराई गई। मंदिर मे भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों द्वारा मंगल समाज बधाई गायन और केलीमाल के पाठ माई री जोरी प्रकट भई, रंग की गौर श्याम घन दामिनी.., गाया।
ठाकुरजी की बधाई शोभायात्रा निकाली
बांके बिहारी जी
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
बांके बिहारी महाराज के प्राकट्योत्सव पर सुबह 8:30 बजे से श्रीनिधिवनराज मंदिर से बधाई शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई दोपहर बाद बांकेबिहारी मंदिर पहुंची।
शोभायात्रा में भगवान गणेश, राधा कृष्ण की झांकी के साथ मुख्य डोले में ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी गोद में लिए विराजमान थे। भक्त मंडली संगीत की धुन पर नाचते गाते चले रहे थे। हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली सहित अन्य राज्यों से आईं महिलाएं और युवतियों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।
दोपहर लगभग 1 बजे शोभायात्रा के बांके बिहारी मंदिर पहुंचने पर सेवायतों द्वारा शोभायात्रा का आरती उतार स्वागत किया। इसके बाद ठाकुर बांके बिहारी महाराज का भोग लगाकर राजभोग आरती की गई।