राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैली राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी में बालू के अवैध खनन के कारण प्रभावित हो रहे पर्यावरण पर सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने शुक्रवार को निरीक्षण किया। कमेटी के सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल के साथ तीनों राज्यों के अधिकारियों की टीम ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में बालू खनन से प्रभावित क्षेत्रों को देखा।
शनिवार को कमेटी के सदस्य बाह में उत्तर प्रदेश सीमा की ओर चंबल सेंक्चुअरी में हो रहे खनन वाले क्षेत्र और इससे पर्यावरण पर पड़े असर का आकलन करने जाएंगे। 11 मई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। उससे पहले कमेटी को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
बृहस्पतिवार शाम को सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी के सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल अधिकारियों के साथ आगरा आ गए थे। उन्होंने शुक्रवार सुबह अधिकारियों के साथ बैठक की और फिर चंबल सेंक्चुअरी में राजस्थान और मध्य प्रदेश सीमा क्षेत्र का निरीक्षण किया। सीईसी सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चंबल सेंक्चुअरी में हो रहे अवैध खनन पर नाराजगी जाहिर की और यह सख्त टिप्पणी की थी कि अगर तीनों राज्यों ने खनन न रोका तो पैरा मिलिट्री फोर्स या सीआरपीएफ को तैनात किया जाएगा तथा पूरे चंबल क्षेत्र में खनन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। तीनों राज्यों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
कोर्ट ने माना- घड़ियाल, डॉल्फिन पर संकट
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल नदी में हो रहे अवैध खनन को पर्यावरणीय संकट बताते हुए कहा था कि इससे घड़ियालों और डॉल्फिन के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अवैध खनन पर रोक लगाने में अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे मिलीभगत का संकेत माना। उसके बाद ही कोर्ट ने हाई-रिजॉल्यूशन वाले, वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए हैं। सीईसी की टीम अनुपालन और अधिकारियों से वार्ता कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सिर्फ 158 केस, 144 वाहन जब्त
तीन साल में राजस्थान सरकार ने चंबल नदी में अवैध खनन पर केवल 158 केस दर्ज किए और 144 वाहन जब्त किए। 88 लाख रुपये का जुर्माना वसूल सके, जबकि हर दिन एक हजार से ज्यादा ट्रक आगरा सीमा में अवैध बालू खनन के प्रवेश करते दिखते हैं। सीईसी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश कर चुकी है कि तीनों राज्य रेत के खनन, परिवहन और भंडारण के सभी रूपों पर तत्काल प्रतिबंध लगाएंगे, जिसमें नदी तल और रेत के टीलों में चलने वाली खुदाई मशीनें, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसी भारी मशीनरी का उपयोग भी शामिल है।