मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास पर प्रदर्शन और उपद्रव के मामले में पुलिस ने 9 नामजद समेत 27 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एफआईआर में हत्या के प्रयास, घर में घुसने, लोक सेवक पर हमला और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
आगरा में कांग्रेसियों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के पैतृक आवास पर प्रदर्शन करने और गेट पर अमर्यादित शब्द लिखने के मामले में पुलिस ने 9 नामजद समेत 27 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें हत्या का प्रयास, घर में घुसना और सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गईं हैं। चौकी प्रभारी रिंग रोड गौरव कुमार गुप्ता वादी बने हैं जबकि घर पर तैनात होमगार्ड को गवाह बनाया गया है। प्राथमिकी में नामजद आरोपियों में से दो को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। बाकी की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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चौकी प्रभारी ने तहरीर में लिखा कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के घर पर उपद्रव की सूचना मिली थी। इस पर वह मौके पर पहुंचे। देखा कि कुछ अराजकतत्वों की भीड़ उग्र होकर नारेबाजी कर रही है। सुरक्षा में तैनात होमगार्ड दिनेश कुमार को भी भीड़ ने घेर लिया। विरोध करने पर लोग हमलावर हो गए। बाद में लोग आवास में घुस गए। जान से मारने की नीयत से होमगार्ड को धक्का दिया। उनके सिर पर ठोस वस्तु से प्रहार भी कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गए। पुलिस ने तहरीर में लिखा कि होमगार्ड बुजुर्ग हैं। दिल के मरीज भी हैं। पुलिस ने घायल होमगार्ड को निजी अस्पताल भेजा। आरोपियों ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट डाली है।
इनके खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
मुकेश धनगर, अनिल यादव, राजेश, मुकेश गौड़, करण सिंह निषाद, विक्रम वाल्मीकि, उमेश शर्मा, राजा गौतम समेत 27 आरोपी हैं।
यह धाराएं लगाईं
बीएनएस-109 (2)- हत्या का प्रयास
बीएनएस-121 (2)- लोक सेवक को ड्यूटी से रोकना। उसके कार्य में बाधा डालना और चोट पहुंचाना।
बीएनएस-126 (2)- किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से उस दिशा में जाने से रोकना जहां जाने का उसका कानूनी अधिकार है।
बीएनएस-132 - किसी लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी/पुलिस) पर उस समय हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना जब वह अपनी ड्यूटी कर रहा हो।
बीएनएस-191 (1)- गैरकानूनी जनसमूह हिंसा या बल का प्रयोग करता है, तो उसका हर सदस्य दंगे का दोषी होता है।
बीएनएस-333 - किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने, हमला करने या उसका रास्ता रोकने की पूरी तैयारी करके किसी के घर में जबरन घुसना।
बीएनएस- 351 (2)- आपराधिक धमकी
बीएनएस- 352- शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किसी का अपमान करना या गाली-गलौज करना।
आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 1932-7- किसी व्यक्ति के काम में बाधा डालने के उद्देश्य से उसे तंग करना।