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UP: आगरा-बांदीकुई रेल दोहरीकरण पर सीईसी की सिफारिश...सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सशर्त मिल सकती है अनुमति

Tue, 11 Nov 2025 09:24 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

बांदीकुई-आगरा ट्रैक का दोहरीकरण होगा। सीईसी ने टीटीजेड में आगरा में 610 और भरतपुर में 961 पेड़ काटने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट से की है।
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रेलवे लाइन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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 बांदीकुई-आगरा रेल लाइन के दोहरीकरण में बाधा बने 1,571 पेड़ों को काटने की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने सशर्त अनुमति देने की सिफारिश की है। कमेटी के चेयरमैन सिद्धांत दास ने सुप्रीम कोर्ट में उत्तर मध्य रेलवे की ओर से दाखिल की गई इंटरलॉक्यूटरी एप्लीकेशन नंबर 31946/2024 में रिपोर्ट नंबर 53 पेश की है। इसमें कमेटी ने बांदीकुई तक 150 किमी लंबे रेलवे ट्रैक के लिए ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में आगरा में 610 और भरतपुर में 961 पेड़ काटने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में बुधवार को सुनवाई होनी है।
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उत्तर मध्य रेलवे ने बीते साल आगरा से बांदीकुई के बीच 150 किमी लंबे एकल रेलवे ट्रैक को दोहरा करने के लिए 2,895 पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी से रिपोर्ट मांगी। कमेटी के सदस्यों ने 28 सितंबर को प्रस्तावित ट्रैक का निरीक्षण किया। आगरा-बांदीकुई रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण पर रेलवे 1,518 करोड़ रुपये खर्च करेगा। 150 किमी लंबे ट्रैक का 83.6 किमी हिस्सा टीटीजेड में है। इसलिए यहां अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसी याचिका पर सीईसी ने कोर्ट से अलाइनमेंट और डिजाइन में बदलाव कर 1,571 पेड़ काटने की सशर्त अनुमति देने की सिफारिश की है।

25 हेक्टेयर में लगाने होंगे 16,230 पेड़
सीईसी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई रिपोर्ट में कहा है कि बांदीकुई मार्ग के दोहरीकरण में शर्तों के साथ पेड़ काटने की अनुमति दी जा सकती है। पेड़ काटने के एवज में करीब 25 हेक्टेयर जमीन पर 16,230 पेड़ लगाने होंगे। रेलवे को पौधरोपण का खर्च उठाना होगा। आगरा में 10.855 हेक्टेयर में 6,220 और भरतपुर में 14.1324 हेक्टेयर में 10,010 पेड़ लगाने हाेंगे। पाैधरोपण के बाद इसे संरक्षित वन के रूप में अधिसूचित करना अनिवार्य होगा। 10 साल तक पौधों की देखभाल करनी होगी और मवेशियों से बचाने के लिए रेलवे को पौधरोपण वाली जगह 2 फीट ऊंची कंक्रीट की दीवार और उसके ऊपर 6 फुट ऊंची चेन-लिंक बाड़ लगानी होगी।
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औसतन दो घंटे लेट हो रही हर ट्रेन
रिपोर्ट में बताया गया है कि आगरा-बांदीकुई सेक्शन पर सिंगल ट्रैक है। यह 126 प्रतिशत तक ओवलोड है। इसी वजह से हर ट्रेन इस ट्रैक पर औसतन दो घंटे तक लेट हो रही है। उत्तर पूर्व के राज्यों और पूर्वी राज्यों के लिए इस सेक्शन को डबल करने की जरूरत रेलवे ने बताई। सीईसी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कहा है कि टीटीजेड चेयरमैन इसकी निगरानी करेंगे और हर अतिरिक्त पेड़ काटने पर एक लाख का जुर्माना लगाएंगे। रेलवे ने दोहरीकरण के बाद तीन मीटर चौड़ी पट्टी में 16,230 पेड़ लगाने पर सहमति दी है। ये पेड़ किरावली से मिढ़ाकुर, सिंगारपुर से किरावली, भरतपुर से ओलेंडा तक लगाए जाएंगे।
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आंकड़ों पर एक नजर
- 1,518 करोड़ रुपये रेल ट्रैक निर्माण पर खर्च होंगे

-150 किमी लंबे सेक्शन में 83.6 किमी टीटीजेड में
-157 छोटे पुलों का होगा निर्माण

- 14 क्रॉसिंग का किया जाना है निर्माण
- 120 मिनट औसत देरी है हर ट्रेन की इस ट्रैक पर
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