मैनपुरी। ग्राम पंचायतों की जांच में देरी अफसरों के लिए भारी पड़ गई। मुख्य विकास अधिकारी ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश दिए। सभी जांच अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है।
जिले में कुल 96 ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं की शिकायतों पर जांच के आदेश दिए गए हैं। इनमें मुख्य विकास अधिकारी द्वारा अलग-अलग अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बीते छह माह से ये जांच लंबित पड़ी हुई हैं। अब तक केवल 46 ग्राम पंचायतों की ही जांच रिपोर्ट आई है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने भी जांच अधिकारियों के स्तर पर लंबित शिकायतों का डाटा तलब किया था। इसमें एक से अधिक जांच लंबित होने पर उन्होंने 13 अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश दिया है। इन पर कुल 37 जांच लंबित हैं।
इनका रोका गया वेतन
अधिकारी का नाम और लंबित जांच -विजय प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी-2
-धीरेंद्र कुमार, आचार्य ग्राम्य विकास संस्थान-3
-अंकिता उप्रेती, सहायक निबंधक एवं सहायक आयुक्त सहकारिता-2
-आरजी गौतम, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी-2 -डॉ. प्रमोद शर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी-2
-डीवी सिंह, उप कृषि निदेशक-3
-डॉ. मुनीष कुमार, डीओ पीआरडी-2
-ओपी तिवारी, एडीओ पंचायत किशनी-2
-राजेश दुबे, एडीओ पंचायत बरनाहल- 4
-विजय सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी-6
-यश वर्मा, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी-4
-डॉ. गगनदीप, जिला कृषि अधिकारी-2
-कृषि रक्षा अधिकारी-3
ग्राम पंचायतों की जांच लंबे समय से जांच अधिकारियों के स्तर पर लंबित हैं। बैठक कर समीक्षा में पता चला कि कई अधिकारियों के पास एक से अधिक जांच कई महीनों से लंबित हैं। उनका वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।