कासगंज। साढ़े पांच साल से लापता युवती की बरामदगी के लिए कोर्ट ने सीबीसीआईडी (अपराध अनुसंधान विभाग शाखा) को आरोपियों की लाइडिटेक्टर टैस्ट कराने की अनुमति नहीं दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय ने सीबीसीआईडी की याचिका को निरस्त कर दिया। जबकि इस मामले में कोतवाली पुलिस पहले ही अपनी एफआर लगा चुकी है।
कासगंज क्षेत्र के एक गांव की युवती 1 मई को लापता हो गई थी। युवती के पिता ने 1 जून को ग्राम निरौली निवासी रोहित, राहुल व दो अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना करने के बाद अपनी एफआर लगा दी। युवती का पता न लग पाने से परिजन काफी परेशान थे। प्रदेेश के डीजीपी के आदेश पर वर्ष 2019 मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी के आगरा खंड के निरीक्षक होशियार सिंह को मामले की विवेचना दी गई।
उनकी विवेचना के बाद भी जब युवती का पता नहीं चला तो उनके द्वारा आरोपियों का लाइडिटेक्टर टैस्ट कराने की अनुमति देने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की। आरोपियों के अधिवक्ता केशव मिश्रा ने संविधान की धारा 20(3) के तहत किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्घ साक्ष्य के लिए बाध्य नहीं किए जाने का हवाला दिया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस के बाद कोर्ट ने सीबीसीआईडी की याचिका को खारिज कर दिया।