विजिलेंस जांच के बाद बाबुओं, सुपरवाइजर के खिलाफ एफआईआर की तैयारी
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शहर में अवैध निर्माण कराने के मामले में विकास प्राधिकरण के तीन रिटायर्ड बाबुओं की गर्दन फंस गई है। विजिलेंस की जांच के बाद इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। एक सेवारत सुपरवाइजर भी दोषी पाया गया है।
विकास प्राधिकरण अवैध निर्माणों के मामले में पहले से ही बदनाम है। अब प्राधिकरण के कर्मचारियों की करतूतें खुलकर सामने आने लगी हैं। विभागीय कार्यवाहियों की बाद अब नौबत मुकदमों तक आ गई है। कोतवाली वार्ड में निष्क्रांत संपत्तियों पर हुए अवैध निर्माणों के मामले में आगरा विकास प्राधिकरण के तीन सेवानिवृत्त क्लर्कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। दरअसल कोतवाली क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों की शिकायत के बाद पहले तो इनकी विभागीय जांच हुई लेकिन जब बात नहीं बनी तो मामला विजिलेंस तक पहुंच गया। विजिलेंस की कई वर्षों की जांच के बाद विकास प्राधिकरण में तैनात बाबू राधेश्याम दुबे, चंद्रभान और बाबू सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। तीनों बाबू रिटायर हो चुके हैं। एक सेवारत सुपरवाइजर हरिशंकर बल्लभ को भी आरोपी बनाया गया है। चूंकि विजिलेंस सीधे तौर पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती है, इसलिए एडीए उपाध्यक्ष से अनुमति मांगी गई है। ज्वाइंट सेक्रेटरी बाबू सिंह ने बताया कि उपाध्यक्ष की अनुमति के बाद ही चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।
बड़ी मछलियां साफ बच निकलीं
आगरा। इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद विकास प्राधिकरण में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। दरअसल कर्मचारियों का मानना है कि किसी अवैध निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित जूनियर इंजीनियर और प्रवर्तन विभाग की होती है लेकिन इस मामले में किसी भी इंजीनियर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं का जा रही है, आफिस में बैठे बाबुओं को बलि का बकरा बनाया गया है।