अधिकृत सर्विस सेंटर का संचालन भी कंपनी की शर्तों के मुताबिक कर रहे थे। कंपनी ने डीलर बनाते समय तय किया था कि फ्री सर्विस कूपन, वारंटी क्लेम्स आदि प्रदान करने के साथ-साथ वाहन बेचने के लिए मार्केटिंग सपोर्ट देगी।
कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी उसके संपर्क में रहेंगे। शर्तों के अनुसार ही शोरूम और वर्कशॉप का निर्माण कराया। विपक्षियों ने सिक्योरिटी के रूप में धनराशि भी जमा कराई। सहयोग का वादा किया लेकिन किया नहीं।
नहीं बिक सके बीएस-4 वाहन
आरोप है कि कंपनी अधिकारियों के सहयोग नहीं करने से पीड़ित का व्यापारिक नुकसान हुआ। बाजार में छवि धूमिल हो गई। इसके बावजूद वह कंपनी के दिशानिर्देश का पालन करते रहे। राजीव मोहन का कहना है कि 31 मार्च, 2020 तक बीएस-4 वाहनों की बिक्री होनी थी।
बिक्री किए गए वाहनों का विवरण कंपनी के साफ्टवेयर में दर्ज होना था। लेकिन आरोपियों ने मार्च, 2020 के प्रथम सप्ताह में ही सॉफ्टवेयर बंद कर दिया। इस कारण कई बीएस-4 वाहनों की बिक्री नहीं हो सकी। इन वाहनों और लाखों के स्पेयर पार्ट्स को वापस नहीं लिया गया।
कई क्लेम्स की धनराशि नहीं दी। उन्होंने मोबाइल, पत्र और ईमेल के माध्यम से संपर्क किया। एकाएक डीलरशिप निरस्त करने का ईमेल भेज दिया गया। जबकि डीलरशिप निरस्त करने से पहले वाहन और पार्ट्स वापस लेने चाहिए थे।
दो महीने पहले सभी हिसाब किताब किया जाना था। उनके शोरूम पर ताला लगा है। कंपनी को अवगत कराने पर कोई जवाब नहीं मिला। कंपनी पर उनके करोड़ों रुपये बकाया हैं।