शुभम ने पैरा कमांडो की बेसिक ट्रेनिंग 2020 में की, लेकिन घातक कमांडो की ट्रेनिंग छह महीने पहले ही बेलगाम में प्राप्त की थी। जिसके बाद उन्हें जम्मू कश्मीर में तैनाती मिली। सैन्य सूत्रों के अनुसार राजोरी के जिस इलाके में कैप्टन शुभम गुप्ता ने वीरगति पाई, वहां भारतीय नागरिक भी फंसे हुए थे।
सबसे पहले राष्ट्रीय राइफल्स के कैप्टन प्रांजल वहां पहुंचे। पहाड़ों में छिपे आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाया। कैप्टन प्रांजल के पीछे स्पेशल फोर्स 9 पैरा के मेजर डीएस मेहरा मुठभेड़ क्षेत्र में पहुंचे। मेजर भी घायल हो गए। जिन्हें कवर करते हुए कैप्टन शुभम गुप्ता ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।
मुठभेड़ क्षेत्र में आगे जाने के लिए शुभम ने कोशिश की। तभी कैप्टन व उनकी टुकड़ी की नजर उस क्षेत्र में फंसे दो बच्चों, महिला व एक पुरुष पर गई। जिन्हें बचाने के लिए उन्होंने सैन्य प्रतिबद्धता दिखाई। शुभम ने आतंकियों से डटकर लोहा लिया।
अदम्य साहस का परिचय देते हुए शुभम ने आतंकियों की गाेलियों का जवाब गोलियों से देना शुरू किया। पहाड़ों में घात लगाए छिपकर बैठे आतंकियों की गोली अचानक शुभम का सीना भेद गई। शुभम वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने देश सेवा के उच्च मापदंडों का पालन करते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
पाकिस्तान ने ड्रोन से गिराए थे हथियार
जम्मू कश्मीर के राजोरी में जिस जगह मुठभेड़ हुई वहां पाकिस्तान ने ड्रोन से आतंकियों के लिए हथियार गिराए थे। अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल आतंकियों ने सैन्य जवानों पर किया। सैन्य सूत्रों ने बताया कि कई दिनों से आतंकी दुर्गम इलाके में घात लगाए हुए थे। सेना की स्पेशल फोर्स को मुखबिर से जब यह खबर मिली तो सेना ने आतंकियों की घेराबंदी शुरू की। अपने मेजर की अगुवाई में कैप्टन शुभम सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे।