कैंसर के महंगे इलाज से जूझ रहे मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने 543 कैंसर दवाओं की कीमतों में 93 फीसदी तक कटौती की है। आगरा के मरीजों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इससे इलाज का खर्च घटेगा और आर्थिक तंगी के कारण उपचार अधूरा छोड़ने की समस्या कम होगी।
एत्मादपुर के भूपेंद्र की पत्नी को पांच महीने पहले मुख के कैंसर का पता चला। निजी अस्पतालों में जांच-ऑपरेशन और दवाओं में करीब चार-पांच लाख रुपये खर्च हो गए। उपचार में जमा पूंजी भी खत्म हो गई। ऐसे में ब्याज पर रुपये लेकर इलाज करा रहे हैं। ये सिर्फ इनकी ही नहीं, ऐसे तमाम मरीज और उनके परिजन की आपबीती है, जो महंगे इलाज को दर्द झेल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने कैंसर दवाओं के 93 फीसदी दाम कर मरीजों को बढ़ी राहत दी है।
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जिले में 12 से अधिक कैंसर रोग विशेषज्ञ हैं। इनके यहां औसतन महीने में छह हजार मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। जांच, कीमोथेरेपी, ऑपरेशन समेत महंगी दवाएं मरीजों की आर्थिक चोट पहुंचा रही हैं। मरीज अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) या फिर चंद छूट पर दवाएं लेने को मजबूर हैं। इससे कई मरीज आर्थिक तंगी के चलते पूरा इलाज नहीं करा पाते। एमआरपी पर दवाएं बिक्री कर मोटा मुनाफा कमाने पर शहर के वरिष्ठ चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही है। इसी बीच सरकार ने 543 दवाओं के दाम 93 फीसदी कम कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मरीजों को इलाज में राहत मिलेगी।
इलाज में खर्च हो गई जमापूंजी
एत्मादपुर के रहने वाले भूपेंद्र ने बताया कि पत्नी के कैंसर की जानकारी होने पर जांच, कीमोथेरेपी, ऑपरेशन, रेडियोथेरेपी में पांच महीने में करीब पांच लाख रुपये खर्च हो गए। सस्ती दवाएं होने से इलाज में आसानी रहेगी।
सरकार के निर्णय से मरीजों को राहत
आगरा कैंसर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज काफी महंगा है। दवाओं की एमआरपी और वास्तविक कीमत में अंतर होता है। सरकार ने कैंसर की दवाएं सस्ती की हैं, इससे मरीजों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी।
कीमत कम होने से इलाज होगा सस्ता
आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने बताया कि कैंसर की 543 दवाओं की कीमतें कम करना बड़ा फैसला है। इससे मरीजों का इलाज सस्ता होगा। हालांकि, दवाओं की कीमतों में कमी का लाभ मरीजों तक पहुंचे, इसके लिए इसकी सख्ती से निगरानी भी होनी चाहिए।
अन्य गंभीर मर्ज की दवाएं भी हों सस्ती
आगरा फार्मा एसोसिएशन के पुनीत कालरा ने बताया कि दवाओं की वास्तविक कीमत और एमआरपी में कई गुना का अंतर होता है। सरकार ने कैंसर की दवाओं के दाम कम किए हैं, इसी तरह अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतें भी कम की जानी चाहिए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
सभी दवाओं पर मिले छूट, कैंसर तक न सिमटे
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि महंगी दवाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कैंसर की दवाओं की कीमतें कम करने का लाभ मरीजों को मिलना चाहिए, लेकिन राहत केवल कैंसर की दवाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सभी जरूरी दवाओं की कीमतें कम करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।