आगरा के राजामंडी बाजार में स्थित लाभचंद्र मार्केट के मामले में नगर निगम और जिला प्रशासन के अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिस मार्केट का पट्टा एक साल पहले निरस्त हो चुका था और उसे 30 दिनों में खाली होना था, वहां अफसर 10 महीने से शांत बैठे हैं। बुलडोजर बाहर नहीं निकला। नतीजा यह हुआ कि पट्टाधारकों पर प्रतिदिन तीन लाख रुपये के हिसाब से हर्जाना 11 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। निगम अब तक न तो कब्जा ले पाया है और न ही एक रुपये की वसूली हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने पर प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद, मंडलायुक्त मागेंद्र प्रताप, तत्कालीन डीएम अरविंद बंगारी, और तत्कालीन नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल समेत आठ बड़े अधिकारी अवमानना में फंस गए। फिर भी अवैध कब्जे पर बुलडोजर नहीं चला। इस मामले की अगली सुनवाई अब 22 मई को होगी, जिसमें अटॉर्नी जनरल खुद बिल्डिंग के ध्वस्तीकरण और विस्थापितों के पुनर्वास की योजना पेश करेंगे।
तत्कालीन नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने 5 अप्रैल 2025 को मार्केट का पट्टा निरस्त किया था। निरस्तीकरण के साथ ही तीन पट्टाधारकों पर एक-एक लाख (कुल तीन लाख) रुपये प्रतिदिन का हर्जाना लगाया गया था। 30 दिन में बेदखली के लिए नगर निगम ने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा था। जिसकी मियाद 16 जून 2025 को खत्म हो गई, लेकिन, धरातल पर कार्रवाई शून्य रही। एक साल में हर्जाना राशि 11 करोड़ तक पहुंच गई है। उधर, नोटिस के 10 महीने बाद भी बेदखली नहीं हो सकी है।
अब फिर दिया 15 दिन का नया अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम की नींद खुली है। 4 मई को कोर्ट में सुनवाई से दो दिन पहले संपत्ति प्रभारी श्रद्धा पांडेय ने पट्टाधारकों को नया नोटिस जारी किया है। इसमें 15 दिन के भीतर स्वयं कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई है, ऐसा न करने पर निगम पुलिस बल के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में डीएम मनीष बंसल का कहना है कि पट्टा निरस्त होने के बाद अब यह निर्माण पूरी तरह अवैध और अतिक्रमण की श्रेणी में है, जिस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है।
नियमों के उल्लंघन पर निरस्त हुआ था पट्टा
लाभचंद्र मार्केट पर नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करने के गंभीर आरोप हैं। सार्वजनिक फुटपाथ पर अवैध पिलर खड़े करने, आवासीय पट्टे की भूमि पर व्यावसायिक होटल का संचालन। बिना अनुमति दूसरी और तीसरी मंजिल का निर्माण। दुकानों को किराये पर दूसरों को देना। पशु प्याऊ का निर्माण न करना। छत पर विज्ञापनों से अवैध कमाई। निगम से स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण के आरोप में नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने लाभचंद्र मार्केट का पट्टा एक साल पहले निरस्त किया था।